News Capsule/न्यूज कैप्सूल: खरीफ दलहन बुवाई में 6.42 लाख हेक्टेयर की कमी, कमजोर मानसून और एल नीनो की आशंकाओं से उत्पादन पर बढ़ी चिंता
31-Jul-2026 05:37 PM
News Capsule/न्यूज कैप्सूल: खरीफ दलहन बुवाई में 6.42 लाख हेक्टेयर की कमी, कमजोर मानसून और एल नीनो की आशंकाओं से उत्पादन पर बढ़ी चिंता
★ 31 जुलाई 2026 तक देश में खरीफ दलहनों की बुवाई 95.18 लाख हेक्टेयर रही, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 101.60 लाख हेक्टेयर थी। यानी इस वर्ष दलहनों का कुल रकबा 6.42 लाख हेक्टेयर कम है। कमजोर मानसून, सामान्य से कम वर्षा और एल नीनो की आशंकाओं के कारण अधिकांश दलहनों की बुवाई प्रभावित हुई है।
★ सबसे अधिक गिरावट अरहर में दर्ज की गई। अरहर का रकबा घटकर 34.91 लाख हेक्टेयर रह गया, जो पिछले वर्ष 38.44 लाख हेक्टेयर था। अरहर लंबी अवधि की फसल होने के कारण अनिश्चित मानसून के बीच किसानों ने इसकी बुवाई कम की।
★ मूंग का रकबा 32.23 लाख हेक्टेयर से घटकर 29.22 लाख हेक्टेयर रह गया, जबकि मोठ की बुवाई 8.66 लाख हेक्टेयर से घटकर 6.95 लाख हेक्टेयर और अन्य दलहनों का रकबा भी मामूली कम हुआ।
★ इसके विपरीत उड़द की बुवाई 19.04 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 21.08 लाख हेक्टेयर हो गई। इसकी प्रमुख वजह बुवाई के समय उड़द के आकर्षक बाजार भाव रहे। साथ ही उड़द एक अल्पावधि की फसल है, जबकि अरहर लंबी अवधि की फसल होने के कारण मौसम का जोखिम अधिक रहता है। इसलिए कई किसानों ने अरहर की बजाय उड़द को प्राथमिकता दी।
★ अधिकांश राज्यों में खरीफ बुवाई की समय-सीमा अब धीरे-धीरे समाप्त हो रही है, जिससे रकबे में उल्लेखनीय सुधार की संभावना कम होती जा रही है।
यदि अगस्त में वर्षा में अपेक्षित सुधार नहीं होता और एल नीनो का प्रभाव बना रहता है, तो खरीफ दलहनों का उत्पादन प्रभावित हो सकता है। ऐसी स्थिति में भारत की आयात निर्भरता बढ़ने की संभावना है, विशेषकर अरहर और अन्य प्रमुख दलहनों में।
★ आई-ग्रेन का मानना है कि घटती बुवाई, मौसम संबंधी जोखिम, सीमित उत्पादन की आशंका और बुवाई विंडो के धीरे-धीरे बंद होने से आने वाले महीनों में दलहन बाजार की धारणा और मजबूत हो सकती है। यदि मौसम में बड़ा सुधार नहीं होता, तो भविष्य में दलहन की कीमतों में और तेजी देखने को मिल सकती है।
