News Capsule/न्यूज कैप्सूल: खरीफ तिलहन बुवाई अन्य खरीफ फसलों की तुलना में मजबूत

31-Jul-2026 05:52 PM

News Capsule/न्यूज कैप्सूल: खरीफ तिलहन बुवाई अन्य खरीफ फसलों की तुलना में मजबूत
★ 31 जुलाई 2026 तक देश में खरीफ तिलहनों की बुवाई 172.32 लाख हेक्टेयर रही, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 171.13 लाख हेक्टेयर थी। यानी कमजोर मानसून, सामान्य से कम वर्षा और एल नीनो की आशंकाओं के बावजूद तिलहनों का कुल रकबा 1.19 लाख हेक्टेयर बढ़ा है।
इसकी प्रमुख वजह तिलहनों के आकर्षक बाजार भाव और अपेक्षाकृत कम पानी की आवश्यकता रही।
★ मूंगफली की बुवाई 41.90 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 43.06 लाख हेक्टेयर हो गई। किसानों को विश्वास है कि यदि बाजार भाव कमजोर भी पड़ते हैं, तो सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीद कर सकती है। इसी भरोसे और बेहतर मूल्य संभावनाओं ने मूंगफली के रकबे को समर्थन दिया।
★ सोयाबीन की बुवाई 118.52 लाख हेक्टेयर से मामूली घटकर 117.68 लाख हेक्टेयर रही। हालांकि क्षेत्रफल में कमी आई है, लेकिन यह बाजार की शुरुआती आशंकाओं से काफी कम है। 
★ आई- ग्रेन इंडिया ने अपनी कई पूर्व रिपोर्टों में अनुमान जताया था कि कमजोर मानसून के कारण सोयाबीन का रकबा घटेगा, लेकिन अन्य खरीफ फसलों की तुलना में इसकी गिरावट सीमित रहेगी। वर्तमान बुवाई के आंकड़े इसी अनुमान की पुष्टि करते हैं।
★ तिल में भी बुवाई बढ़कर 8.17 लाख हेक्टेयर से 9.27 लाख हेक्टेयर हो गई, जबकि सूरजमुखी का रकबा 0.58 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 0.98 लाख हेक्टेयर पहुंच गया। यह भी दर्शाता है कि किसानों ने कम पानी वाली तिलहन फसलों को प्राथमिकता दी।
★ अब अधिकांश राज्यों में खरीफ बुवाई की समय-सीमा धीरे-धीरे समाप्त हो रही है, जिससे रकबे में किसी बड़े सुधार की संभावना कम है। ऐसे में बाजार की नजर अगस्त की वर्षा और फसल की बढ़वार पर रहेगी।
★ यदि अगस्त में वर्षा सामान्य नहीं रहती और एल नीनो का प्रभाव बना रहता है, तो विशेष रूप से सोयाबीन की उत्पादकता प्रभावित हो सकती है।
★ ऐसे में उत्पादन अनुमान घट सकते हैं, जिससे घरेलू तिलहन एवं खाद्य तेल बाजार को समर्थन मिलेगा और आने वाले महीनों में सोयाबीन सहित तिलहनों की कीमतों में मजबूती देखने को मिल सकती है।

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