News Capsule/न्यूज कैप्सूल: भारत चावल योजना का दायरा बढ़ा, रिकॉर्ड सरकारी भंडार के बावजूद बाजार मजबूत, एल नीनो पर टिकी आगे की दिशा
31-Jul-2026 05:09 PM
News Capsule/न्यूज कैप्सूल: भारत चावल योजना का दायरा बढ़ा, रिकॉर्ड सरकारी भंडार के बावजूद बाजार मजबूत, एल नीनो पर टिकी आगे की दिशा
★ सरकार ने भारत चावल योजना के तहत चालू वर्ष के लिए 3 लाख टन चावल आवंटित किया है। पिछले वर्ष की तुलना में यह मात्रा पर्याप्त मानी जा रही है। संसद में दिए गए लिखित उत्तर के अनुसार 31 मार्च 2026 तक भारत चावल योजना के तहत कुल 18.70 लाख टन चावल आवंटित किया गया था, जिसमें से 17.39 लाख टन का उठाव और 17.29 लाख टन की बिक्री हुई थी।
★ सरकार ने 31 अक्टूबर 2026 तक भारत चावल का अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) 5 एवं 10 किलोग्राम पैक के लिए ₹35 प्रति किलो तथा 30 किलोग्राम पैक के लिए ₹33 प्रति किलो निर्धारित किया है। इसके बाद 1 नवंबर 2026 से MRP क्रमशः ₹36 और ₹34 प्रति किलो हो जाएगा।
सरकारी भंडार रिकॉर्ड स्तर पर है। 1 जुलाई 2026 को FCI के पास 403 लाख टन चावल (जिसमें 387 लाख टन धान शामिल है) का स्टॉक उपलब्ध था, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 377 लाख टन चावल और 266 लाख टन धान था।
★ दूसरी ओर, एथेनॉल निर्माण में FCI चावल का उपयोग लगातार बढ़ रहा है। वर्ष 2022-23 में 1.69 लाख टन, 2023-24 में 15.15 लाख टन, 2024-25 में 8.96 लाख टन और 2025-26 में लगभग 52 लाख टन चावल एथेनॉल उत्पादन में उपयोग किया गया। चालू एथेनॉल आपूर्ति वर्ष (ESY 2025-26) में अब तक यह मात्रा बढ़कर 54 लाख टन हो चुकी है। FCI अभी तक 75 लाख टन चावल इथेनॉल बनाने के लिए आवंटित कर चुकी है।
★ FCI एथेनॉल डिस्टिलरियों को OMSS के तहत ₹2,320 प्रति क्विंटल की दर से चावल उपलब्ध करा रहा है, जबकि वित्त वर्ष 2026-27 के लिए FCI की औसत अधिग्रहण लागत (MSP, भंडारण एवं वहन लागत सहित) लगभग ₹4,013 प्रति क्विंटल है। नवंबर 2026 से एथेनॉल के लिए बिक्री मूल्य बढ़ाकर ₹2,390 प्रति क्विंटल किया जाएगा, जो अब भी अधिग्रहण लागत से काफी कम है।
★ हालांकि, रिकॉर्ड सरकारी स्टॉक, भारत चावल योजना के तहत पर्याप्त आवंटन और एथेनॉल के लिए लगातार चावल उपलब्ध कराने के बावजूद खुले बाजार में कीमतों पर कोई दबाव देखने को नहीं मिल रहा है।
★ इसका मुख्य कारण कमजोर मानसून, एल नीनो की बढ़ती आशंकाएं और खरीफ धान उत्पादन को लेकर बनी अनिश्चितता है, जिसने बाजार की धारणा को मजबूत बनाए रखा है।
★ यदि आने वाले महीनों में वर्षा सामान्य से कम रहती है और उत्पादन प्रभावित होता है, तो पर्याप्त सरकारी भंडार के बावजूद चावल की कीमतों में मजबूती बनी रह सकती है। बाजार की आगे की दिशा मानसून, खरीफ उत्पादन और सरकार की नीतियों पर निर्भर करेगी।
