मार्च की असामान्य गर्मी से रबी फसलों को हो सकता है ख़तरा
27-Feb-2026 12:53 PM
नई दिल्ली। इस वर्ष मार्च का महीना काफी गर्म एवं शुष्क रहने का अनुमान लगाया जा रहा है और इसके तहत गेहूं तथा सरसों के प्रमुख उत्पादक राज्यों में तापमान औसत स्तर से ऊंचा रहने की सम्भावना व्यक्त की गयी है। इससे इन दोनों फसलों की औसत उपज दर में कमी आ सकती है। इसके अलावा तेज गर्मी से अन्य रबी फसलों के भी प्रभावित होने की आशंका बढ़ जाएगी।
भारत दुनिया में गेहूं का दूसरा सबसे प्रमुख उत्पादक देश है और यहां विदेशों से इसके आयत की आवश्यकता नहीं पड़ती है। लेकिन तिलहन-तेल के मामले में स्थिति विपरीत है। भारत खाद्य तेलों का सबसे बड़ा आयातक देश बना हुआ है। यदि ऊंचे तापमान से सासों का उत्पादन प्रभावित हुआ तो खाद्य तेलों के आयात पर निर्भरता घटाने का प्रयास सफल नहीं हो पाएगा।
मार्च का महीना रबी फसलों के लिए काफी महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि इसी अवधि में फसलों में दाना लगने तथा इसके परिपक्व होने की प्रक्रिया जारी रहती है। ज्यादा गर्मी से दाने का विकास बाधित हो सकता है और नियत समय से पूर्व ही उसके पकने की प्रक्रिया शुरू हो सकती है। इससे दाने की क्वालिटी और उपज दर पर असर पड़ सकता है। इसके फलस्वरूप कुल पैदावार में कमी आ सकती है।
भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) के एक विशेषज्ञ का कहना है कि मार्च 2026 के दौरान देश के उत्तरी एवं पश्चिमोत्तर राज्यों में उच्चतम और न्यूनतम तापमान सामान्य औसत स्तर से काफी ऊंचा रह सकता है। वैसे आईएमडी का आधिकारिक अनुमान भी जल्दी ही सामने आने वाला है। विशेषज्ञ के मुताबिक मार्च माह के दौरान पंजाब, हरियाणा, राजस्थान तथा उत्तर प्रदेश में और साथ ही साथ मध्य प्रदेश के कुछ भागों में भी उच्चतम तापमान सामान्य औसत से 7 डिग्री सेल्सियस तक ऊंचा रह सकता है।
