मानसून और खरीफ सीजन
30-May-2026 11:00 AM
अल नीनो मौसम चक्र के प्रभाव से इस वर्ष दक्षिण-पश्चिम मानसून का संतुलन और समीकरण बिगड़ने की आशंक है। अगले महीने अल नीनो के आने की संभावना है जबकि मानसून भी जून में ही आने वाला है।
पहले 26 मई को केरलम के दक्षिणी तट पर भारत की मुख्य भूमि में इसके पहुंचने की भविष्यवाणी की गई थी लेकिन वह समय बीत चुका है। मानसून अभी श्रीलंका में है और यदि मौसमी परिस्थितियां अनुकूल रही तो 4-5 जून तक यह भारत में आ सकता है जो 1 जून की नियत तिथि से कुछ पीछे है।
आमतौर पर जून के पहले सप्ताह में आने के बावजूद मानसून की स्थिति लगभग सामान्य रहती है और वर्षा में ज्यादा कमी नहीं आती है लेकिन इस बार हालात कुछ भिन्न हैं। मानसून पर अल नीनो का व्यापक असर पड़ने की आशंका व्यक्त की जा रही है। स्वयं मौसम विभाग ने सामान्य औसत की तुलना में इस बार 90 प्रतिशत बारिश होने का अनुमान लगाया है जबकि पहले 92 प्रतिशत वर्षा की संभावना व्यक्त की थी।
इससे स्पष्ट संकेत मिलता है कि इस वर्ष मानसून कमजोर रहेगा। इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि मानसूनी वर्षा का वितरण अनियमित, अनिश्चित एवं बेतरतीब हो सकता है जो खरीफ फसलों के लिए प्रतिकूल होगा। देश के कुछ भागों में अधिक वर्षा हो सकती है जबकि अन्य क्षेत्रों में सूखे का संकट उत्पन्न हो सकता है।
जून से भारत में खरीफ फसलों की बिजाई का सीजन औपचारिक तौर पर शुरू हो जाता है। राष्ट्रीय स्तर पर अभी फसलों की बिजाई और खासकर धान की रोपाई के लिए स्थिति अनुकूल नहीं है। हरेक क्षेत्र में पानी और नमी का अभाव है। मानसूनी वर्षा का इंतजार किया जा रहा है क्योंकि बारिश के बाद ही बिजाई की रफ्तार बढ़ सकेगी।
दलहन-तिलहन की खेती करने वाले किसान काफी चिंतित हैं क्योंकि उन्हें सही समय पर इसकी बिजाई शुरू होने में संदेह है। जुलाई-अगस्त में भी अल नीनो की वजह से वर्षा कम होने की संभावना है। सरकार स्थिति से निपटने के लिए कुछ तैयारी कर रही है।
