खरीफ से पहले गंभीर मृदा नमी संकट | एल नीनो का जोखिम बढ़ा रहा चिंता
29-Apr-2026 02:47 PM
खरीफ से पहले गंभीर मृदा नमी संकट | एल नीनो का जोखिम बढ़ा रहा चिंता
देश के प्रमुख कृषि क्षेत्रों में व्यापक स्तर पर मृदा नमी की कमी देखी जा रही है।
रेड जोन का प्रभुत्व दर्शाता है कि खरीफ बुवाई से पहले मिट्टी में नमी सामान्य से कम है, जिससे सभी प्रमुख फसलें प्रभावित हो सकती हैं।
मुख्य प्रभाव
1. कमजोर शुरुआत का जोखिम
कम मिट्टी की नमी के कारण बुवाई में देरी और अंकुरण प्रभावित हो सकता है।
इसका असर धान, दलहन, तिलहन, कपास और मोटे अनाज जैसी खरीफ फसलों पर पड़ेगा।
2. मानसून पर बढ़ती निर्भरता
फसलों का प्रदर्शन अब समय पर और समान रूप से वितरित मानसून वर्षा पर निर्भर रहेगा।
बारिश में देरी या असमान वितरण से रकबा और उत्पादन प्रभावित हो सकता है।
3. एल नीनो का बढ़ता जोखिम
सामान्य से कम वर्षा और लंबे सूखे अंतराल की संभावना बढ़ेगी, जिससे मौजूदा नमी संकट और गहरा सकता है।
4. उत्पादन जोखिम → आपूर्ति में कमी
यदि खरीफ उत्पादन प्रभावित होता है, तो
* कुल उत्पादन घट सकता है
* घरेलू उपलब्धता में कमी आएगी
* आयात पर निर्भरता बढ़ सकती है (विशेषकर दलहन और खाद्य तेलों में)
बाजार संकेत
मौसम से जुड़ा जोखिम कई कमोडिटी की मौजूदा कीमतों को प्रभावित कर सकता है।
यह नमी संकट कृषि बाजारों के लिए एक शुरुआती चेतावनी संकेत है।
यदि मानसून कमजोर रहता है:
खरीफ फसलों (धान, दलहन, तिलहन, कपास) के दाम बढ़ सकते हैं
विभिन्न कमोडिटी में आयात मांग बढ़ सकती है
निष्कर्ष
भारत खरीफ 2026 में बेहद कम मृदा नमी के साथ प्रवेश कर रहा है।
यदि एल नीनो के कारण मानसून कमजोर रहता है, तो सभी प्रमुख फसलों के उत्पादन पर गंभीर जोखिम उत्पन्न हो सकता है।
