कमजोर मानसून से खरीफ कालीन दलहनों का उत्पादन प्रभावित होने की आशंका
29-Apr-2026 03:45 PM
नई दिल्ली। चालू वर्ष के दौरान खरीफ कालीन दलहन फसलों को अब नीनो मौसम चक्र एवं मानसून की कमजोर बारिश का संकट झेलना पड़ सकता है जिससे इसकी बिजाई, प्रगति एवं पैदावार प्रभावित होने की आशंका है। यदि उत्पादन में गिरावट आई तो देश में तुवर, उड़द एवं मसूर आदि का आयात बढ़ सकता है। घरेलू प्रभाग में दलहनों की आपूर्ति एवं उपलब्धता की स्थिति जटिल हो सकती है और कीमतों में इजाफा हो सकता है।
भारत वैश्विक दलहन इकोसिस्टम का मुख्य केन्द्र है। एक तरफ यह दलहनों का सबसे बड़ा उत्पादक एवं उपभोक्ता देश है तो दूसरी ओर यहां दलहनों का सर्वाधिक आयात भी होता है। खरीफ 2025 एवं रबी 2026 में उत्पादन उत्साहवर्द्धक नहीं रहा और अब खरीफ 2026 की फसलों पर खतरा बढ़ता दिखाई पड़ रहा है।
बेशक विदेशों से दलहनों का आयात वित्त वर्ष 2024-25 की तुलना में 2025-26 के दौरान कम हुआ मगर इसका कारण घरेलू उत्पादन में वृद्धि नहीं बल्कि पूर्व में आयातित दलहनों का ऊंचा स्टॉक मौजूद रहना माना गया है। अब वह स्टॉक काफी कम रह गया है इसलिए अगला उत्पादन कम होने से दलहनों का आयात स्वाभाविक रूप से बढ़ सकता है।
दलहनों के अधिकांश निर्यातक देशों का ध्यान भारत पर ही केन्द्रित रहता है। पिछले चार वर्षों से देश में दलहनों का बिजाई क्षेत्र घट रहा है।
भारत में खरीफ सीजन के दौरान मुख्यतः तुवर, उड़द एवं मूंग तथा रबी सीजन के दौरान चना मसूर एवं मटर का उत्पादन होता है। इस बार अल नीनो का गंभीर खतरा उत्पन्न हो सकता है जिससे दलहनों के बिजाई क्षेत्र एवं उत्पादन में और भी कमी आ सकती है। उर्वरकों का भी कुछ अभाव महसूस हो सकता है।
