कम बारिश होने पर भी खरीफ उत्पादन में भारी गिरावट आना मुश्किल

29-Apr-2026 05:16 PM

नई दिल्ली। यद्यपि अल नीनो मौसम चक्र के संभावित प्रभाव को देखते हुए मौसम विभाग ने इस वर्ष मानसून सीजन के दौरान सामान्य औसत से कम वर्षा होने का अनुमान लगाया है लेकिन सरकार का मानना है कि बेहतर सिंचाई व्यवस्था मौजूद होने से खरीफ फसलों पर कमजोर मानसून का सीमित प्रभाव पड़ेगा और इसलिए खरीफ सीजन में विभिन्न फसलों के उत्पादन में जोरदार गिरावट आना मुश्किल है। 

सरकार का कहना है कि हाल के वर्षों में देश के अंदर सिंचित क्षेत्रों का दायरा काफी बढ़ा है और वहां फसलों की सिंचाई के लिए समुचित मात्रा में पानी उपलब्ध हो जाएगा। लेकिन कृषि विशेषज्ञों ने आगाह किया है कि गैर सिंचित या वर्षा पर आश्रित इलाकों में फसलों की पैदावार एवं किसानों की आमदनी में भारी गिरावट आ सकती है।

एक रेटिंग एजेंसी के अनुसार देश में सिंचित भूमि का क्षेत्रफल बढ़कर 56 प्रतिशत पर पहुंच गया है जबकि 2014-15 में यह 49 प्रतिशत ही था। उस समय देश में लगातार सूखे का प्रकोप भी देखा जा रहा था। अब वैसी स्थिति नहीं है। फसलों की नई-नई किस्मों का विकास हो रहा है जिसकी न केवल उपज दर ऊंची रहती है बल्कि जिसमें प्रतिकूल मौसम की प्रतिरोधक क्षमता भी ज्यादा होती है। 

एक किसान संगठन के अनुसार खरीफ सीजन में कम से कम 15 प्रतिशत उत्पादन क्षेत्र पूरी तरह वर्षा पर आश्रित रहता है। इस वर्ष देश के पूर्वोत्तर पश्चिमोत्तर एवं दक्षिणी प्रायद्वीपीय भाग में मानसून की वर्षा सामान्य या इससे अधिक होने की उम्मीद है जिससे खासकर धान की फसल को ज्यादा खतरा नहीं रहेगा।

लेकिन कमजोर मानसून के कारण दलहन, तिलहन एवं कपास की फसल के लिए जोखिम बढ़ सकता है। यह देखना आवश्यक होगा कि जून से सितम्बर के चार महीनों में वर्षा का वितरण किस तरह का रहता है। कुछ क्षेत्रों में भारी बारिश हो सकती है जबकि कुछ अन्य इलाकों में सूखे का गभीर संकट उत्पन्न हो सकता है।