खरीफ फसलों के उत्पादन क्षेत्र में भारी गिरावट का सिलसिला जारी
13-Jul-2026 08:00 PM
नई दिल्ली। जुलाई के शुरुआती 10 दिनों के दौरान देश के विभिन्न राज्यों में मानसून की अच्छी बारिश होने से खरीफ फसलों की बिजाई की स्थिति में सुधार हो गया लेकिन इसका रकबा फिर भी गत वर्ष से काफी पीछे रह गया। केन्द्रीय कृषि मंत्रालय के नवीनतम आंकड़ों से पता चलता है कि इस वर्ष 10 जुलाई तक देश में खरीफ फसलों का कुल उत्पादन क्षेत्र 531.25 लाख हेक्टेयर तक ही पहुंच सका जो पिछले साल की समान अवधि के बिजाई क्षेत्र 632.69 लाख हेक्टेयर से 101.44 लाख हेक्टेयर या 16.03 प्रतिशत कम तथा सामान्य औसत क्षेत्रफल 1104.45 लाख हेक्टेयर के 50 प्रतिशत से भी बहुत कम है।
सभी संवर्ग की फसलों का रकबा पीछे चल रहा है मगर गन्ना इसका अपवाद है जिसका बिजाई क्षेत्र गत वर्ष के 56.72 लाख हेक्टेयर से 86 हजार हेक्टेयर बढ़कर इस बार 57.58 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया है। इसका क्षेत्रफल पिछले दो-तीन सप्ताह से इसी स्तर पर स्थिर बना हुआ है जिससे संकेत मिलता है कि इसकी बिजाई का अभियान लगभग समाप्त हो गया है।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार पिछले साल की तुलना में चालू खरीफ सीजन के दौरान 10 जुलाई तक धान का उत्पादन क्षेत्र 125.53 लाख हेक्टेयर से घटकर 114.69 लाख हेक्टेयर, दलहनों का बिजाई क्षेत्र 73.65 लाख हेक्टेयर से लुढ़ककर 56.63 लाख हेक्टेयर, मोटे अनाजों का क्षेत्रफल 127.30 लाख हेक्टेयर से लुढ़ककर 98.69 लाख हेक्टेयर तथा तिलहन फसलों का रकबा 149.18 लाख हेक्टेयर से घटकर 117.83 लाख हेक्टेयर रह गया। इसी तरह कपास का बिजाई क्षेत्र भी 93.95 लाख हेक्टेयर से गिरकर 79.54 लाख हेक्टेयर पर अटक गया। खरीफ फसलों की बिजाई अभी जारी है।
दलहन फसलों में अरहर (तुवर), उड़द, मूंग और मोठ के बिजाई क्षेत्र में काफी गिरावट आई है। इसी तरह मोटे अनाजों के संवर्ग में ज्वार, बाजरा, मक्का एवं रागी का रकबा गत वर्ष से काफी पीछे चल रहा है। इतना ही नहीं बल्कि तिलहनों के संवर्ग में भी सोयाबीन एवं तिल के उत्पादन क्षेत्र में भारी कमी आई लेकिन मूंगफली एवं सूरजमुखी का रकबा बढ़ गया। मूंगफली के दोगुनी बढ़ोत्तरी हो चुकी है।
