खरीफ फसलों के बिजाई क्षेत्र में सुधार का सिलसिला जारी

28-Jul-2026 05:09 PM

नई दिल्ली। जून की निष्क्रियता को पीछे छोड़कर जुलाई में जब दक्षिण-पश्चिम मानसून नए सिरे से एक्टिव हुआ तब भारतीय किसानों ने खरीफ फसलों की खेती का दायरा तेजी से बढ़ाना शुरू कर दिया। इसके फलस्वरूप उत्पादन क्षेत्र में   नियमित रूप से सुधार आने लगा और पिछले साल की तुलना में इस बार रकबे में गिरावट का अंतर घटकर 5 प्रतिशत से भी नीचे आ गया। 

24 जुलाई 2026 वाले सप्ताह के दौरान खरीफ फसलों के कुल उत्पादन क्षेत्र में गत वर्ष की समान अवधि के मुकाबले 3 लाख हेक्टेयर से अधिक की बढ़ोत्तरी दर्ज की गई। इसके फलस्वरूप बिजाई क्षेत्र में गिरावट का जो अंतर 5 जुलाई वाले सप्ताह तक 21 प्रतिशत पर था वह 24 जुलाई वाले सप्ताह में गिरकर 5 प्रतिशत से भी नीचे आ गया। 

कृषि वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि खरीफ फसलों की बिजाई पर अल नीनो मौसम चक्र का कोई विशेष गंभीर एवं प्रतिकूल असर नहीं पड़ेगा। पंचवर्षीय औसत क्षेत्रफल के सापेक्ष 71 प्रतिशत भाग में फसलों की बिजाई पहले ही पूरी हो चुकी है लेकिन फिर भी अगले दो माह के दौरान होने वाली बारिश पर गहरी नजर रखनी होगी क्योंकि फसलों की प्रगति के लिए यह स्थिति बहुत खास या महत्वपूर्ण होती है। बिजाई की प्रक्रिया अगस्त में भी जारी रहेगी। 

केन्द्रीय कृषि मंत्रालय के आंकड़ों से पता चलता है कि इस वर्ष 24 जुलाई तक खरीफ फसलों का कुल उत्पादन क्षेत्र 787.38 लाख हेक्टेयर पर पहुंचा जो पिछले साल की इसी अवधि के बिजाई क्षेत्र 826.19 लाख हेक्टेयर से 4.7 प्रतिशत कम और सामान्य औसत क्षेत्रफल 1100 लाख हेक्टेयर का 71 प्रतिशत है। 

आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक इस वर्ष 18 से 24 जुलाई वाले सप्ताह के दौरान देश भर में 129.19 लाख हेक्टेयर में खरीफ फसलों की बिजाई हुई जबकि पिछले साल की समान अवधि में 125.72 लाख हेक्टेयर में ही खेती हुई थी। इधर मानसून की वर्षा में कुल कमी भी 30 जून तक के 37 प्रतिशत से घटकर 27 जुलाई को 16 प्रतिशत रह गई।