चीनी बाजार में तेजी-मजबूती का माहौल बरकरार
20-Aug-2026 06:04 PM
नई दिल्ली। तमाम सरकारी उपायों एवं सख्त नियमों के बावजूद चीनी के एक्स फैक्टरी मूल्य एवं खुले बाजार भाव में तेजी-मजबूती का माहौल बरकरार है। समझा जाता है कि मिलर्स द्वारा सीमित मात्रा में चीनी का स्टॉक रिलीज किया जा रहा है और इसका दाम भी ऊंचा रखा जा रहा है। डीलर्स / स्टॉकिस्टों को ऊंचे भाव पर चीनी खरीदनी पड़ रही है जिससे इसका मूल्य स्वाभाविक रूप से बढ़ रहा है।
त्यौहारी सीजन में चीनी की मांग एवं खपत अक्सर बढ़ जाती है और कीमत भी कुछ ऊंची रहती है। यह कोई नई बात नहीं है। लेकिन इस बार कीमत बढ़ नहीं रही है बल्कि उछल रही है। जब एक्स फैक्टरी मूल्य एवं थोक भाव 5000 रुपए प्रति क्विंटल से ऊपर पहुंच जाए तो खुदरा दाम स्वभाविक रूप से 55 रुपए प्रति किलो के नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच जाएगा। फिलहाल कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिल रहा है।
दरअसल इस बार चीनी बाजार पर कुछ मनोवैज्ञानिक असर पड़ रहा है। अगले महीने (सितम्बर) के अंत में 2025-26 का मार्केटिंग सीजन समाप्त होने वाला है। 30 सितम्बर 2026 को भारतीय उद्योग के पास महज 40 लाख टन के आसपास या उससे भी कम चीनी का स्टॉक उपलब्ध रहने की उम्मीद है जबकि आमतौर पर कम से कम 60-62 लाख टन का स्टॉक मौजूद रहता है। मिलों पर चीनी का स्टॉक बेचने का कोई खास दबाव नहीं है इसलिए उसे दाम बढ़ाने और रुक-रूककर स्टॉक की बिक्री करने का अवसर मिल रहा है।
डीलर्स / स्टॉकिस्टों को भय है कि सितम्बर-अक्टूबर में उसे चीनी का कम स्टॉक प्राप्त हो सकता है जबकि उसकी जोरदार मांग निकल सकती है। सरकार ने मिलों से खरीद के बाद 7 दिनों के अंदर डीलर्स को चीनी का उठाव सुनिश्चित करने का आदेश दिया है जबकि 1 सितम्बर से एक नया नियम लागू होने वाला है जिसके तहत 10 टन से ज्यादा मासिक कारोबार करने वाले डीलर्स को 15 दिनों से ज्यादा का स्टॉक रखने से वंचित होना पड़ेगा।
