भारत और चीन के बीच चावल व्यापार में गतिरोध बढ़ा
12-Aug-2026 05:42 PM
हैदराबाद। भारत के साथ चावल के कारोबार में चीन न सिर्फ दादागिरी दिखाने लगा है बल्कि वह अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारतीय चावल को बदनाम करने का कुरियत प्रयास भी कर रहा है। चीन की सरकार ने यह आरोप लगाते हुए सात भारतीय चावल निर्यातकों का पंजीकरण निरस्त कर दिया है कि उसने जिस चावल का शिपमेंट किया था उसमें जीएम चावल का अंश पाया गया है। उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व चालू वर्ष के आरंभ में भी चीन ने तीन भारतीय चावल निर्यातकों का रजिस्ट्रेशन कैंसिल कर दिया था।
केन्द्रीय सीमा शुल्क प्रशासन द्वारा रजिस्ट्रेशन को निरस्त करने का सीधा अर्थ यह है कि चीन में इन भारतीय निर्यातकों को चावल की आपूर्ति करने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है जिसमें वे तीन निर्यातक भी शामिल हैं जिनका रजिस्ट्रेशन पहले स्थगित किया गया था। चावल निर्यात की ये कंपनियां छत्तीसगढ़, कर्नाटक एवं आंध्र प्रदेश में स्थित हैं।
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार चीन का यह निर्णय एक सोचा समझा कदम है। चूंकि चालू वर्ष के लिए चावल खरीद की उसकी जरूरत लगभग पूरी हो चुकी है इसलिए वह अनाप-शनाप बहाना बनाकर इसके आयात को रोकना चाहता है।
सारी दुनिया जानती है कि भारत सहित दक्षिण एशिया के किसी भी देश में जीएम चावल का उत्पादन नहीं होता है और न ही भारत में विदेशों से चावल का आयात किया जाता है क्योंकि भारत स्वयं संसार में चावल का सबसे अग्रणी निर्यातक देश बना हुआ है।
भारतीय बंदरगाहों पर शिपमेंट आरंभ होने से पूर्व उसकी एजेंसियां चावल की सभी खेपों की अच्छी तरह जांच-पड़ताल करती हैं और परिणाम से पूरी तरह संतुष्ट होने के बाद ही शिपमेंट को क्लीयरेंस देती है। भारतीय चावल में जीएम उत्पाद की उपस्थिति का कोई आधार ही नहीं है। चीन का इरादा निश्चित रूप से कुछ ओर है।
निर्यातक इस पर हैरानी व्यक्त कर रहे हैं कि भारतीय बंदरगाह पर चाइनीज एजेंसी जब खेपों के शिपमेंट को हरी झंडी दिखती है तब इसमें जीएम चावल नहीं होता है मगर चीन के बंदरगाहों पर उसमें जीएम माल पाया जाता है।
