आंध्र प्रदेश में वर्षा की भारी कमी से खरीफ फसलों पर गंभीर खतरा

28-Aug-2026 10:43 AM

विजयवाड़ा। दक्षिण भारत के एक महत्वपूर्ण कृषि उत्पादक राज्य- आंध्र प्रदेश में मानसूनी बारिश की भारी कमी से खरीफ फसलों के लिए गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया है। अल नीनो मौसम चक्र के प्रभाव से मानसून के कमजोर पड़ने के कारण आंध्र प्रदेश में वर्षा की कमी का स्तर बढ़कर 51 प्रतिशत पर पहुंच गया है। राज्य सरकार ने इस विषम परिस्थिति से निपटने के लिए एक योजना की घोषणा की है। 

इस वर्ष 1 जून से 25 अगस्त के दौरान आंध्र प्रदेश में केवल 193 मि०मी० बारिश हुई जी दीर्घकालीन औसत (एलपीए) 393.7 मि०मी० से काफी कम रही। इससे न केवल राज्य में खरीफ फसलों का रकबा घट गया बल्कि उसकी प्रगति पर भी असर पड़ रहा है।  

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार आंध्र प्रदेश में खरीफ फसलों का कुल उत्पादन क्षेत्र पिछले साल के 25.63 लाख हेक्टेयर से 21 प्रतिशत घटकर इस बार 20.35 लाख हेक्टेयर रह गया है। इसके तहत धान का क्षेत्रफल 11.79 लाख हेक्टेयर से घटकर 10.37 लाख हेक्टेयर रह गया। मोटे अनाजों एवं तिलहन फसलों की बिजाई भी कम क्षेत्रफल में हुई है  मगर दलहन एवं कपास का रकबा कुछ बढ़ गया है।

मानसूनी वर्षा की भारी कमी के कारण राज्य के कई जिलों में सूखे जैसी स्थिति देखी जा रही है। खेतों की मिटटी में नमी का भारी-अभाव होने से खरीफ फसलों का उचित ढंग से विकास नहीं हो रहा है वर्षा की कमी को देखते हुए राज्य सरकार ने धान के 1.29 लाख हेक्टेयर परम्परागत क्षेत्र में अन्य फसलों की खेती का लक्ष्य रखा था मगर इसमें से केवल 36 हजार हेक्टेयर या 28 प्रतिशत लक्ष्य ही हासिल हो सका।