आंध्र प्रदेश में खरीफ फसलों का रकबा गत वर्ष से पीछे
20-Aug-2026 10:47 AM
विजयवाड़ा। दक्षिण भारतीय राज्य- आंध्र प्रदेश में तुवर, उड़द एवं कपास का रकबा बढ़ने के बावजूद खरीफ फसलों का कुल उत्पादन क्षेत्र गत वर्ष से पीछे चल रहा है क्योंकि धान, मक्का एवं सोयाबीन जैसी फसलों के बिजाई क्षेत्र में कमी आ गई है। वहां खरीफ फसलों का कुल उत्पादन क्षेत्र 19 अगस्त तक 18.90 लाख हेक्टेयर पर ही पहुंच सका जो गत वर्ष की समान अवधि के बिजाई क्षेत्र 20.03 लाख हेक्टेयर से 1.13 लाख हेक्टेयर कम है।
राज्य कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार गत वर्ष की तुलना में चालू खरीफ सीजन के दौरान आंध्र प्रदेश में धान का उत्पादन क्षेत्र 10.69 लाख हेक्टेयर से घटकर 9.43 लाख हेक्टेयर, मोटे अनाजों का रकबा 1.79 लाख हेक्टेयर से गिरकर 1.33 लाख हेक्टेयर तथा तिलहनों का बिजाई क्षेत्र 1.74 लाख हेक्टेयर से फिसलकर 1.72 लाख हेक्टेयर रह गया जबकि दूसरी ओर दलहनों का क्षेत्रफल 1.91 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 2.42 लाख हेक्टेयर तथा कपास का रकबा 3.76 लाख हेक्टेयर से सुधरकर 3.84 लाख लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया। गन्ना के क्षेत्रफल में भी कुछ वृद्धि हुई है।
मोटे अनाजों में मक्का का उत्पादन क्षेत्र 1.39 लाख हेक्टेयर से घटकर 95 हजार हेक्टेयर रह गया। बाजरा तथा रागी का रकबा भी कुछ पीछे है।
दलहन फसलों में अरहर (तुवर) का उत्पादन क्षेत्र 1.70 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 2.10 लाख हेक्टेयर तथा उड़द का बिजाई क्षेत्र 15 हजार हेक्टेयर से सुधरकर 25 हजार हेक्टेयर पर पहुंचा। मूंग की बिजाई सीमित क्षेत्रफल में हुई है।
तिलहनों के संवर्ग में मूंगफली का उत्पादन क्षेत्र 1.41 लाख हेक्टेयर से घटकर 1.30 लाख हेक्टेयर रह गया मगर अरंडी का बिजाई क्षेत्र 21 हजार हेक्टेयर से सुधरकर 25 हजार हेक्टेयर और सोयाबीन का क्षेत्रफल 5 हजार हेक्टेयर से बढ़कर 9 हजार हेक्टेयर पर पहुंच गया।
