देशी चना में आपूर्ति की कमी से तेजी का आधार मजबूत
20-Aug-2026 11:22 AM
नई दिल्ली। देशी चना की उत्पादक मंडियों में आवक लगातार कमजोर बनी हुई है। गत वर्ष की समान अवधि की तुलना में इस समय मंडियों में चना की आवक करीब 40 प्रतिशत कम बताई जा रही है। कमजोर आवक के कारण दाल मिलों को पर्याप्त कच्चा माल नहीं मिल पा रहा है। यही कारण है कि पिछले करीब 15 दिनों में देशी चना के भाव में लगभग ₹200 प्रति क्विंटल की तेजी दर्ज की गई है।
चौतरफा आपूर्ति कमजोर, किसानों के पास स्टॉक सीमित
पिछले एक पखवाड़े में देशी चना की आपूर्ति लगभग सभी प्रमुख क्षेत्रों से कमजोर हुई है। किसानों के घरों से अधिकांश चना बिक चुका है, जबकि उत्पादक मंडियों में भी आवक सीमित है। ईरान-इजरायल-अमेरिका संघर्ष के कारण परिवहन लागत और ट्रक भाड़े में बढ़ोतरी से दूर-दराज की मंडियों से आपूर्ति प्रभावित हुई है। कमजोर उपलब्धता का असर दिल्ली बाजार पर भी दिखाई दे रहा है। हल्की ग्राहकी निकलते ही लॉरेंस रोड पर राजस्थान लाइन का चना ₹6,450–6,475 प्रति क्विंटल तक पहुंच गया है। इस वर्ष चना के दाने अपेक्षाकृत छोटे बताए जा रहे हैं, जिससे प्रति हेक्टेयर उत्पादकता कमजोर रहने की संभावना है।
NAFED की सीमित बिक्री भी ऊंचे भाव पर
बाजार में उपलब्धता को देखते हुए NAFED द्वारा चना की बिक्री फिलहाल सीमित मात्रा में की जा रही है और अच्छे भाव मिलने की खबर है। बाजार सूत्रों के अनुसार NAFED के पास करीब 18–19 लाख टन चना उपलब्ध है, जिसे आवश्यकता पड़ने पर बाजार में उतारा जा सकता है।
आयातित चना भी महंगा
घरेलू आपूर्ति कमजोर होने के बीच आयातित चना भी बाजार को पर्याप्त राहत नहीं दे पा रहा है। ऑस्ट्रेलिया में चना के भाव करीब 670/680 डॉलर प्रति टन के आसपास चल रहे हैं। ऊंचे समुद्री एवं परिवहन भाड़े के कारण आयातित माल महंगा पड़ रहा है। वर्तमान परिस्थितियों में उत्पादक मंडियों से दिल्ली तक चना मंगाने पर करीब ₹300 प्रति क्विंटल या उससे अधिक की अतिरिक्त लागत बैठ रही है। ऑस्ट्रेलिया में हाल ही में चना के भाव में करीब 20–25 डॉलर प्रति टन की तेजी से आयात पड़ता और महंगा हुआ है।
दाल मिलों की जरूरत आधारित खरीद जारी
घरेलू चना और आयातित माल की महंगी लागत को देखते हुए दाल मिलें अपनी आवश्यकता के अनुसार खरीद कर रही हैं। हालांकि दाल के भाव कमजोर रहने से खरीदारी बहुत आक्रामक नहीं है, लेकिन कच्चे माल की सीमित उपलब्धता के कारण मिलों को बाजार में बने रहना पड़ रहा है।
₹6,500 के स्तर पर नजर
कमजोर घरेलू आवक, किसानों के पास सीमित स्टॉक, महंगा आयात और बढ़ी हुई परिवहन लागत को देखते हुए चना बाजार में मजबूती का आधार बना हुआ है। यदि उत्पादक मंडियों में आवक इसी तरह कमजोर रहती है, तो घरेलू चना में ₹6,500 प्रति क्विंटल का स्तर देखने को मिल सकता है।
हालांकि ऊंचे भाव पर दाल की मांग कमजोर पड़ने और मुनाफावसूली बढ़ने से बीच-बीच में नरमी संभव है। NAFED के पास उपलब्ध 18–19 लाख टन का स्टॉक तेजी के दौरान बाजार में अतिरिक्त आपूर्ति का विकल्प बना हुआ है। इसके बावजूद फिलहाल कमजोर आवक और महंगे आयात के कारण चना बाजार का रुख मजबूत बना हुआ है।
