677 लाख हेक्टेयर के रकबे के साथ रबी फसलों की बिजाई समाप्त

10-Feb-2026 10:37 AM

नई दिल्ली। रबी फसलों की खेती राष्ट्रीय स्तर पर पूरी हो चुकी है। सरकारी आंकड़ों से इसकी पुष्टि होती है। पिछले सप्ताह के मुकाबले 6 फरवरी 2026 को समाप्त हुए सप्ताह के दौरान रबी फसलों के रकबे में अत्यन्त मामूली बदलाव हुआ। केन्द्रीय कृषि मंत्रालय ने जो नया आंकड़ा जारी किया है

उससे पता चलता है कि रबी फसलों का कुल उत्पादन क्षेत्र 2024-25 के 661 लाख हेक्टेयर से 16 लाख हेक्टेयर या 2.4 प्रतिशत बढ़कर 2025-26 में 677 लाख हेक्टेयर हो गया। इसके तहत गेहूं का बिजाई क्षेत्र करीब 1.9 प्रतिशत सुधरकर 334.17 लाख हेक्टेयर पर पहुंचा।

इसी तरह दलहन फसलों का रकबा 3.7 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 140 लाख हेक्टेयर के करीब पहुंचा जिसमें चना एवं मसूर जैसे दलहनों का विशेष योगदान रहा। रबी कालीन मोटे अनाजों का क्षेत्रफल भी 1.6 प्रतिशत बढ़कर 61 लाख हेक्टेयर के आसपास पहुंच गया। कुल मिलाकर साप्ताहिक आधार पर अनाजी फसलों के रकबा में कोई खास बदलाव नहीं देखा गया। 

तिलहन फसलों का उत्पादन क्षेत्र भी गत वर्ष की तुलना में इस बार 3.8 प्रतिशत बढ़कर 97 लाख हेक्टेयर से ऊपर पहुंचा। इसके तहत खासकर सरसों के बिजाई क्षेत्र में अच्छी बढ़ोत्तरी हुई जबकि मूंगफली, सूरजमुखी, अलसी तथा सैफ्लावर का क्षेत्रफल भी कुछ बढ़ गया। 

मोटे अनाजों में मक्का, जौ एवं रागी के रकबे में इजाफा हुआ है मगर ज्वार का क्षेत्रफल पीछे रह गया। दलहन फसलों में मिश्रित रूख देखा गया। रबी कालीन धान का उत्पादन क्षेत्र पिछले साल से आगे रहा। 

दलहन-तिलहन की अगैती-बिजाई वाली फसलों की छिटपुट कटाई-तैयारी आरंभ हो चुकी है और शुरुआती चरण में इसकी उपज दर तथा क्वालिटी संतोषजनक देखी जा रही है। मौसम में अब बदलाव होने लगा है और तापमान में वृद्धि होने से गर्मी बढ़ने लगी है।

ऊंचा तापमान रबी फसलों के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है। अगले महीने (मार्च) से सरसों एवं चना की जोरदार आवक शुरू हो जाएगी इसलिए फरवरी का मौसम उसके लिए अनुकूल रहना आवश्यक है। फिलहाल स्थिति सामान्य बनी हुई है।