व्यापार घाटा कम करने हेतु मूल्य संवर्धित उत्पादों का निर्यात बढ़ाना जरुरी
08-May-2026 03:48 PM
नई दिल्ली। अग्रणी अर्थशास्त्रियों का कहना है कि राष्ट्रीय अर्थ व्यवस्था के विकास की रफ्तार बढ़ाने तथा विदेशी व्यापार घाटे को कम करने के लिए भारत को मूल्य संवर्धित उत्पादों का निर्यात बढ़ाने पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। घरेलू प्रभाग में मूल्य संवर्धन पर जोर देने से रोजगार के नए अवसरों का निर्माण होगा और देश की आमदनी बढ़ेगी। मूल्य संवर्धन के लिए नई-नई तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाया जाएगा।
भारत का विदेश व्यापार घाटा चिंताजनक स्तर तक ऊंचा हो गया है। बहुमूल्य विदेशी मुद्रा का तेजी से बहिर्गमन हो रहा है जो राजकोष पर दबाव डाल रहा है और भारतीय मुद्रा (रुपया) को निरन्तर कमजोर कर रहा है। यदि साबुत जिंसों के बजाए मूल्य संवर्धित उत्पादों का निर्यात बढ़ाने पर जोर दिया जाए तो एक साथ अनेक फायदे हो सकते हैं।
भारत से मसालों का अधिकांश निर्यात साबुत रूप में ही होता है। हालांकि हाल के वर्षों में इसके मूल्य संवर्धित उत्पादों का निर्यात बढ़ा है लेकिन फिर भी कुल शिपमेंट में इसकी भागीदारी अभी बहुत कम है। इसी तरह कपास (रूई) के बजाए अगर सूती धागा, सूती वस्त्र एवं अन्य सम्बन्धित उत्पादों का निर्यात बढ़ाने पर जोर दिया जाए तो आमदनी में अच्छी बढ़ोत्तरी होगी और अर्थ व्यवस्था के विकास को बल मिलेगा। खाद्य प्रसंस्करण उद्योग के विकास-विस्तार पर नए सिरे से ध्यान दिए जाने की आवश्यकता है।
भारत से अनेक कृषि एवं खाद्य उत्पादों का निर्यात बड़े पैमाने पर होता है लेकिन फिर भी कुल वैश्विक निर्यात में इसकी हिस्सेदारी बहुत कम है। भारत को अंतर्राष्ट्रीय बाजार के अनुकूल अपना खास ब्रांड तैयार करना होगा और इसकी क्वालिटी तथा कीमत की विश्वसनीयता सुनिश्चित करनी होगी। इसमें सरकार का सहयोग समर्थन एवं नीतिगत प्रोत्साहन मिलना भी आवश्यक है।
