वर्षा की कमी 10 प्रतिशत से ज्यादा होने पर खरीफ उत्पादन प्रभावित होने की आशंका
27-Jul-2026 04:30 PM
नई दिल्ली। केन्द्र सरकार का कहना है कि जब कभी मानसून की बारिश में 10 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आती है तब खरीफ फसलों का उत्पादन प्रभावित होने की आशंका बढ़ जाती है। वैसे 10-12 प्रतिशत कम वर्षा होने पर उत्पादन में ज्यादा गिरावट नहीं आती है। लेकिन यदि वर्षा की कमी ज्यादा हो तो खरीफ कालीन खाद्यान्न का उत्पादन अधिक घट सकता है।
यदि अखिल भारतीय स्तर पर दीर्घकालीन औसत के सापेक्ष वर्षा में 10 प्रतिशत से अधिक की कमी वार्ता है तो उत्पादन का ज्यादा असर पड़ता है। वर्ष 1982, 1987, 2004, 2009, 2014 एवं 2015 में या तो अल नीनो का प्रकोप रहा या सूखे का गंभीर संकट देखा गया था। इन वर्षों में सामान्य औसत की तुलना में 12 से 22 प्रतिशत तक कम बारिश हुई थी और इसके अनुरूप खरीफ उत्पादन भी अलग-अलग स्तर से प्रभावित हुआ था। उत्पादन में कभी कम कभी ज्यादा गिरावट आई।
केन्द्रीय कृषि राज्य मंत्री के अनुसार हाल के वर्षों में खरीफ उत्पादन पर प्रतिकूल मौसम का कम प्रभाव देखा गया है क्योंकि देश के अंदर सिंचाई सुविधाओं का विकास-विस्तार हुआ है। फसलों की उन्नत एवं सूखा-रोधी किस्मों का प्रयोग एवं प्रचलन तेजी से बढ़ा है। मौसम की भविष्यवाणी बेहतर ढंग से की जा रही है और फसल प्रबंधन की आधुनिक विधियों को किसानों द्वारा तेजी से अपनाया जा रहा है। इसके अलावा राज्यों में आपदा कालीन योजनाए बडे पैमाने पर क्रियान्वित की जा रही हैं तथा केन्द्र सरकार द्वारा सही समय पर हस्तक्षेप भी किया जा रहा है।
2026-27 के मौजूदा खरीफ सीजन के लिए विभिन्न फसलों की बिजाई अभी जारी है जबकि इसके उत्पादन का पहला अग्रिम अनुमान फिलहाल जारी नहीं किया गया है। धान, दलहन, तिलहन, मोटे अनाज और कपास जैसी फसलों का रकबा गत वर्ष से पीछे चल रहा है। मौसम विभाग ने इस वर्ष मानसून की बारिश सामान्य औसत से 10 प्रतिशत कम होने की संभावना व्यक्त की है जबकि एक अग्रणी प्राइवेट मौसम एजेंसी ने बारिश में 15-16 प्रतिशत की कमी आने का अनुमान लगाया है।
