मोटे अनाजों के बिजाई क्षेत्र में 19.30 लाख हेक्टेयर की भारी गिरावट

27-Jul-2026 04:11 PM

नई दिल्ली। मानसून की वर्षा का अभाव होने पर सामान्यतः किसानों का रुझान मोटे अनाजों की खेती की ओर बढ़ता है क्योंकि इसकी फसलों को सिंचाई के लिए पानी की कम आवश्यकता पड़ती है और इन फसलों में सूखे की स्थिति को ज्यादा समय तक बर्दाश्त करने की क्षमता होती है। लेकिन परम्परा के विपरीत इस बार खरीफ सीजन में दोनों प्रमुख मोटे अनाजों- मक्का एवं बाजरा के बिजाई क्षेत्र में जबरदस्त गिरावट देखी जा रही है। 

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार मोटे अनाजों का उत्पादन क्षेत्र पिछले साल के 161.50 लाख हेक्टेयर से 19.30 लाख हेक्टेयर लुढ़ककर इस बार 24 जुलाई तक 142.20 लाख हेक्टेयर पर अटक गया जो पंचवर्षीय औसत क्षेत्रफल 182.63 लाख हेक्टेयर से 40.40 लाख हेक्टेयर कम है। चूंकि बिजाई की प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच गई है इसलिए रकबे का यह विशाल अंतर पाटना आसान नहीं होगा। 

पिछले साल की तुलना में चालू खरीफ सीजन के दौरान बाजरा का बिजाई क्षेत्र 58.08 लाख हेक्टेयर से लुढ़ककर 49.54 लाख हेक्टेयर, मक्का का उत्पादन क्षेत्र 86.15 लाख हेक्टेयर से घटकर 77.79 लाख हेक्टेयर, ज्वार का क्षेत्रफल 12.45 लाख हेक्टेयर से गिरकर 44.07 लाख हेक्टेयर तथा रागी का रकबा 2.16 लाख हेक्टेयर से फिसलकर 1.56 लाख हेक्टेयर रह गया। बाजरा के सबसे प्रमुख उत्पादक प्रान्त- राजस्थान में बिजाई काफी घट गई है।