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19-Oct-2026 01:00 PM
तिरुअनन्तपुरम। 15-16 अक्टूबर को सक्रिय हुआ उत्तर-पूर्व मानसून दो दिनों तक तमिलनाडु, पांडीचेरी, कराईकल तथा तटीय आंध्र प्रदेश में घूम रहा था जबकि चालू सप्ताह के दौरान यह आगे बढ़कर केरल तथा कर्नाटक में पहुंच जाने की संभावना है। कर्नाटक में दक्षिण-पश्चिम मानसून की बारिश कम हुई थी इसलिए उत्तर-पूर्व मानसून से किसानों को काफी उम्मीदें हैं।
उधर केरल में होने वाली बारिश मसाला फसलों और खासकर छोटी इलायची एवं कालीमिर्च तथा बागानी फसलों- चाय, कॉफी, सुपारी एवं रबड़ आदि के लिए वरदान साबित हो सकती है। इलायची की तुड़ाई-तैयारी वहां पहले ही शुरू हो चुकी है जबकि कालीमिर्च की तुड़ाई-तैयारी नवम्बर-दिसम्बर में होगी। कर्नाटक में भी कालीमिर्च की फसल को बारिश की सख्त आवश्यकता है। कर्नाटक देश में कालीमिर्च का सबसे प्रमुख उत्पादक राज्य है।
गत 17 अक्टूबर (शनिवार) को उत्तर-पूर्व मानसून अत्यन्त उग्र रूप में सामने आया जिससे तमिलनाडु में अत्यन्त मूसलाधार (12 से०मी० से अधिक) तथा तटीय आंध्र प्रदेश, रायल सीमा, तेलंगाना तथा दक्षिणी आंतरिक कर्नाटक में भारी वर्षा (7-11 से०मी०) दर्ज की गई। इस वर्षा से जहां खरीफ फसलों को राहत मिली वहीं बांधों जलाशयों में भी पानी का सत्र कुछ ऊंचा उठाने में सहायता मिली।
मौसम विभाग का कहना है कि उत्तर-पूर्व मानसून दक्षिण भारत के विभिन्न भागों में लगातार उग्र, सघन एवं मजबूत होता जा रहा है और फिलहाल इस पर अल नीनो मौसम चक्र का कोई खास नकारात्मक असर दिखाई नहीं पड़ रहा है। अगले चार-पांच दिनों में केरल, माही एवं दक्षिणी आंतरिक कर्नाटक और और तटीय आंध्र प्रदेश, यानम, रॉयल सीमा और आसपास के क्षेत्रों में भारी वर्षा होने की उम्मीद है।