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29-Sep-2026 06:04 PM
नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश तथा बिहार के बहुत बड़े भाग में पिछले कुछ दिनों के दौरान हुई अत्यन्त मूसलाधार बारिश एवं नदियों में आई भयंकर बाढ़ के कारण न केवल जान-माल का भारी नुकसान हुआ है बल्कि खेतों में खड़ी खरीफ फसलों के लिए संकट भी गंभीर हो गया है।
इन दोनों प्रांतों के अनेक जिलों में बाढ़ वर्षा का पानी चारों ओर खेतों में फैल गया है और फसलें उसमें डूब गई हैं। धान की फसल तो जैसे-तैसे इस संकट को पार कर सकती है लेकिन दलहन-तिलहन एवं मोटे अनाजों की फसल के लिए यह स्थिति जानलेवा साबित हो सकती है। कुछ क्षेत्रों में गन्ना की फसल को भी इस बाढ़-वर्षा से गंभीर खतरा होने की आशंका है। वैसे इन दोनों राज्यों में कपास की खेती नहीं या नगण्य होती है।
उत्तर प्रदेश में लखीमपुर खेड़ी, बांदा, बहराइच, हमीरपुर, शाजहांपुर, कानपुर, प्रयागराज एवं सीतापुर सहित कई अन्य जिलों में भी बाढ़ का गंभीर प्रकोप देखा जा रहा है। सरकारी आंकड़ों से पता चलता है कि उत्तर प्रदेश में 15 जिलों के 2415 गांवों में 31174 हेक्टेयर भूमि में खरीफ फसलें पूरी तरह जल मग्न हो चुकी हैं। यह आरंभिक आंकड़ा है जबकि नुकसान की वास्तविक तस्वीर बाढ़ के पानी उतरने के बाद ही सामने आएगी।
उधर बिहार में पटना, नालंदा, सुपौल, खगड़िया, मधेपुरा, पूर्णिया, कटिहार, भागलपुर एवं बेगूसराय सहित, कई अन्य जिलों में खरीफ फसलों को बाढ़ ने अपनी चपेट में ले लिया है जिससे वहां कृषि उत्पादन एवं किसानों की आमदनी बुरी तरह प्रभावित होने की आशंका है।