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29-Sep-2026 05:14 PM
नई दिल्ली। केन्द्रीय कृषि मंत्री ने कहा है कि केन्द्र सरकार कर्नाटक तथा महाराष्ट्र में सूखे की स्थिति का आंकलन विश्लेषण करने के लिए जल्दी ही एक टीम वहां भेजेगी। कर्नाटक के लिए केन्द्रीय दल 3 अक्टूबर को रवाना होगा। उधर महाराष्ट्र का लगभग दो-तिहाई भाग गंभीर सूखे की चपेट में फंसा हुआ है। जहां खरीफ फसलों को काफी क्षति पहुंचने की आशंका है।
कृषि मंत्री के मुताबिक पानी की उपलब्धता एवं खेतों की मिटटी में मौजूदा नमी के आधार पर कर्नाटक, महाराष्ट्र, तेलंगाना तथा आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में रबी फसलों की खेती के लिए नए सिरे से योजना बनाने की आवश्यकता पड़ेगी। रबी फसलों की बिजाई सही समय पर होना जरुरी है ताकि उसकी बेहतर उपज दर सुनिश्चित हो सके। वर्षा पर आश्रित इलाकों तथा सिंचाई सुविधाओं से मुक्त क्षेत्रों के लिए अलग-अलग रणनीति तैयार की जानी चाहिए जो उस भौगोलिक हिस्से के अनुकूल हो।
इस वर्ष 1 जून से 28 सितम्बर के बीच सामान्य औसत के मुकाबले महाराष्ट्र में कुल संचयी वर्षा 19 प्रतिशत तथा कर्नाटक में 30 प्रतिशत कम हुई जबकि अखिल भारतीय स्तर पर वर्षा की कमी 12 प्रतिशत दर्ज की गई। यद्यपि कुल संचयी वर्षा सामान्य औसत से कम हुई है लेकिन हाल के सप्ताहों में इसका अंतर काफी घट गया है। जून के अंत तक यह भी 35 प्रतिशत पर पहुंच गई थी जो अब 12 प्रतिशत रह गई है।
अनेक प्रमुख कृषि उत्पादक राज्यों में सामान्य औसत से कम वर्षा होने के कारण रबी फसलों की बिजाई में किसानों को कठिनाई हो सकती है। बांधों-जलाशयों में पानी का स्टॉक भी कुछ क्षेत्रों और खासकर दक्षिण भारत में कमी नीचे है। कृषि मंत्री न राज्यों को आगामी रबी सीजन में दलहन एवं तिलहन फसलों की खेती को प्राथमिकता देने के लिए कहा है।