तिलहन फसलों का घरेलू उत्पादन बढ़ने के आसार
20-May-2026 08:25 PM
मुम्बई। स्वदेशी वनस्पति तेल उद्योग एवं व्यापार क्षेत्र के एक अग्रणी संगठन- सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सी) का कहना है कि अंतर्राष्ट्रीय बाजार में खाद्य तेलों का भाव ऊंचा चल रहा है और रुपए की कमजोरी से इसका आयात महंगा बैठ रहा है।
इससे क्रशिंग-प्रोसेसिंग इकाइयों को किसानों से ऊंचे दाम पर सोयाबीन, सरसों एवं मूंगफली जैसी तिलहन फसलों की खरीद करने का प्रोत्साहन मिल रहा है। यदि सीमा शुल्क की दर में बढ़ोत्तरी की गई तो खाद्य तेलों का आयात और भी महंगा हो जाएगा और भारतीय किसानों को परोक्ष रूप से तिलहन फसलों का उत्पादन बढ़ाने का प्रोत्साहन मिलेगा।
तीनों प्रमुख तिलहन फसलों- सरसों, सोयाबीन एवं मूंगफली का थोक मंडी भाव उछलकर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से ऊपर पहुंच गया है जिससे किसानों को आकर्षक आमदनी प्राप्त हो रही है। खरीफ कालीन तिलहन फसलों- सोयाबीन एवं मूंगफली की बिजाई अगले महीने से शुरू होने वाली है।
केन्द्र सरकार ने इन दोनों तिलहनों के एमएसपी में अच्छी बढ़ोत्तरी कर दी है। सोयाबीन का न्यूनतम समर्थन मूल्य 5328 रुपए प्रति क्विंटल से बढ़ाकर 5708 रुपए प्रति क्विंटल तथा मूंगफली का एमएसपी 7263 रुपए प्रति क्विंटल से बढ़ाकर 7517 रुपए प्रति क्विंटल नियत किया गया है। इसके अलावा सूरजमुखी, तिल और नाइजर सीड के समर्थन मूल्य में भी भारी बढोत्तरी की गई है।
सरसों का समर्थन मूल्य 6200 रुपए प्रति क्विंटल चल रहा है। इससे सरकार को एमएसपी पर सरसों खरीदने की जरूरत नहीं पड़ रही है। अप्रैल 2026 में लगभग 16 लाख टन सरसों की क्रशिंग होने की सूचना मिल रही है जिससे किसानों को भारी आर्थिक फायदा हुआ। सोयाबीन और मूंगफली का भाव भी एमएसपी से काफी ऊपर पहुंच गया है।
