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शुरूआती गिरावट के बाद मोटे अनाजों का रकबा गत वर्ष से आगे

21-Sep-2026 01:10 PM

शुरूआती गिरावट के बाद मोटे अनाजों का रकबा गत वर्ष से आगे

नई दिल्ली। चालू खरीफ सीजन में मक्का एवं रागी का रकबा काफी पिछड़ने के कारण लम्बे समय तक मोटे अनाजों का उत्पादन क्षेत्र गत वर्ष से पीछे चल रहा था लेकिन बाद में न केवल ज्वार एवं बाजरा के बिजाई क्षेत्र में भारी बढ़ोत्तरी हो गई बल्कि रागी का रकबा भी सुधरकर पिछले साल के काफी करीब पहुंच गया। मक्का के क्षेत्रफल में कमी का अंतर भी घट गया। 

केन्द्रीय कृषि मंत्रालय के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार चालू खरीफ सीजन में 18 सितम्बर तक मोटे अनाजों का कुल उत्पादन क्षेत्र बढ़कर 185.79 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया जो पिछले साल की समान अवधि के बिजाई क्षेत्र 184.63 लाख हेक्टेयर से 1.16 लाख हेक्टेयर ज्यादा है। 

गत वर्ष की तुलना में मौजूदा खरीफ सीजन के दौरान मोटे अनाजों के संवर्ग में यद्यपि रागी का रकबा 10.12 लाख हेक्टेयर से गिरकर 9.81 लाख हेक्टेयर तथा मक्का का क्षेत्रफल 94.88 लाख हेक्टेयर से घटकर 92.76 लाख हेक्टेयर रह गया लेकिन ज्वार का उत्पादन क्षेत्र 12.61 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 13.79 लाख हेक्टेयर तथा बाजरा का बिजाई क्षेत्र 62.87 लाख हेक्टेयर से उछलकर 64.94 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया। स्मॉल मिलेट्स की बिजाई का दायरा भी 4.15 लाख हेक्टेयर से सुधरकर इस बार 4.49 लाख हेक्टेयर हो गया। मोटे अनाजों की बिजाई लगभग समाप्त हो गई है। 

राजस्थान सहित कुछ अन्य प्रांतों में सामान्य बारिश होने से ज्वार, बाजरा एवं मक्का की फसल काफी हद तक संतोषजनक स्थिति में बताई जा रही है लेकिन दक्षिणी भारत में खासकर कर्नाटक, तेलंगाना एवं आंध्र प्रदेश में वर्षा कम होने से फसल को नुकसान होने की आशंका है। मक्का के घरेलू उत्पादन में भारी गिरावट आने का अनुमान लगाया जा रहा है।