सरकारी खरीद से दलहन बाजार को समर्थन मिलने की उम्मीद

26-Mar-2026 12:32 PM

नई दिल्ली। हालांकि रबी सीजन के दोनों प्रमुख दलहनों-चना एवं मसूर के नए माल की आवक बढ़ने से कीमतों पर दबाव पड़ रहा है लेकिन न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर सरकारी खरीद शुरू होने से कीमतों में नरमी पर ब्रेक लगने की सम्भावना है। पश्चिम एशिया में स्थिति असामान्य होने से इसके आयात पर भी असर पड़ सकता है।

एक अग्रणी विश्लेषक के अनुसार शिपिंग चार्ज ऊंचा रहें तथा भारतीय मुद्रा (रुपया) का भारी अवमूल्यन होने से चना एवं मसूर का आयात महंगा बैठ रहा है। आयातित दलहनों का ऊंचा दाम स्वदेशी चना एवं मसूर के मूल्य पर सकारात्मक असर डालेगा। इस बीच सरकार ने अपनी एजेंसियों के माध्यम से इन दोनों दलहनों को खरीदना आरम्भ कर दिया है। तुवर की सरकारी खरीद भी जारी है। इससे प्रतीत होता है कि दलहनों का भाव अब और नीचे नहीं जाएगा। दाम घटने से किसानों की चिंता बढ़ रही थी।

यह सही है कि मार्च क्लोजिंग के कारण दलहनों की खरीद में दाल मिलर्स-प्रोसेसर्स एवं व्यापरियों-स्टॉकिस्टों की सक्रियता फ़िलहाल कम देखी जा रही है लेकिन जल्दी ही यह स्थिति बदल सकती है और अगेल महीने यानी अप्रैल से दलहनों में असामान्य कारोबार आरम्भ हो सकता है। इससे भी बाजार में कुछ मजबूती आएगी।

केंद्र सरकार ने 2025-26 के रबी सीजन हेतु चना का न्यूनतम समर्थन मूल्य 5875 रुपए प्रति क्विंटल तथा मसूर का 7000 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित किया है। आगामी समय में थोक मंडी भाव इसके आसपास पहुंच सकता है। कृषि मंत्रालय ने दोनों दलहनों का उत्पादन 2024-25 सीजन से ज्यादा होने का अनुमान लगाया है। मंडियों में आवक बढ़ने लगी है।