साप्ताहिक समीक्षा- धान-चावल

11-Jul-2026 09:01 PM

उम्मीद से बेहतर कारोबार होने से धान-चावल का भाव तेज 

नई दिल्ली। हालांकि पश्चिम एशिया का संकट एक बार फिर गंभीर हो गया है और ईरान-अमरीका युद्ध दोबारा शुरू हो जाने से होर्मुज स्ट्रेट का जलमार्ग व्यावसायिक जहाजों की आवाजाही के लिए असुरक्षित हो गया है लेकिन भारतीय बाजारों में 4-10 जुलाई वाले सप्ताह के दौरान धान-चावल में अच्छा कारोबार हुआ और कीमतों में तेजी देखी गई। मंडियों में अभी मुख्यतः बासमती तथा 'ए' ग्रेड का गैर बासमती धान आ रहा है। 
दिल्ली 
लेकिन कुल मिलाकर धान की आपूर्ति सीमित मंडियों में हो रही है जिसमें नरेला, भाटापाड़ा, राजिम, शाहजहांपुर, जहांगीराबाद, खैर, डिबई, कोटा एवं बूंदी आदि मंडियां शामिल हैं। 
उत्तर प्रदेश 
उत्तर प्रदेश की मंडियों में पहले धान की आपूर्ति काफी घट गई थी लेकिन कीमतों में तेजी की सुगबुगाहट आरंभ होने के बाद आवक भी बढ़ने लगी। वहां 4-10 जुलाई वाले सप्ताह के दौरान जहांगीराबाद मंडी में 10 हजार बोरी, शाहजहांपुर में 20 हजार बोरी, अलीगढ़ में 800-100 बोरी, खैर में 5000 बोरी तथा डिबई में 8 हजार बोरी तक धान की दैनिक आवक हुई। 
राजस्थान 
कोटा-बूंदी में भी अच्छी मात्रा में धान पहुंचा। इसी तरह भाटापाड़ा एवं राजिम मंडियों में धान की सामान्य आवक होती रही और अधिकांश मंडियों में कीमत भी 100-200 रुपए प्रति क्विंटल तेज रही। 
चावल 
जहां तक चावल का सवाल है तो इसकी खरीद में दिसावरी व्यापारियों एवं निर्यातकों की अच्छी दिलचस्पी देखी गई लेकिन पंजाब के अमृतसर में कुछ श्रेणियों एवं किस्मों के चावल के दाम में 250 से 350 रुपए प्रति क्विंटल तक की भारी गिरावट आ गई। वहां निर्यातकों ने चावल खरीदने में ज्यादा सक्रियता नहीं दिखाई। होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही में अनिश्चितता का माहौल बनने से पश्चिम एशिया, मध्य-पूर्व एवं खाड़ी क्षेत्र के देशों में एक बार भारतीय बासमती चावल के निर्यात में बाधा पड़ने की आशंका पैदा हो गई है। बूंदी में भी चावल का भाव नरम रहा लेकिन दिल्ली के नया बाजार में मिश्रित रुख देखा गया।