रिकॉर्ड सरकारी स्टॉक से दलहनों की आपूर्ति बढ़ाने में मिलेगी सहायता
06-Jun-2026 01:18 PM
नई दिल्ली। चना की भरपूर खरीद होने से केन्द्रीय बफर स्टॉक में दलहनों की मात्रा बढ़कर मई 2026 में 43 लाख टन के शीर्ष स्तर पर पहुंच गई जो मई 2025 के स्टॉक 18 लाख टन से करीब ढाई गुणा तथा मई 2024 के स्टॉक 21 लाख टन से लगभग दो गुणा ज्यादा है। दलहनों का घरेलू बाजार भाव सीमित उतार-चढ़ाव के साथ एक निश्चित दायरे में लगभग स्थिर बना हुआ है और निकट भविष्य में इसमें जोरदार तेजी-मंदी आने की संभावना नहीं है। आगामी समय में चना की मांग कुछ मजबूत हो सकती है।
अन्तर्राष्टीय बाजार में भी दलहनों की कीमतों में भारी उठा-पटक नहीं देखी जा रही है। भारत में देसी चना, पीली मटर एवं लाल मसूर के आयात की गति धीमी देखी जा रही है। घरेलू प्रभाग में विभिन्न दलहनों की आपूर्ति एवं उपलब्धता की स्थिति सुगम बनी हुई है जबकि दाल मिलर्स एवं व्यापारी इसकी खरीद में कोई जल्दबाजी नहीं दिखा रहे हैं।
इस बार मानसून की बारिश कम होने की संभावना है मगर खरीफ कालीन दलहनों की बिजाई पर इसका कोई गंभीर प्रतिकूल असर पड़ना मुश्किल लगता है। सरकारी आंकड़ों से भी इसका संकेत मिलता है। केन्द्रीय कृषि मंत्रालय ने 2025-26 के मुकाबले 2026-27 के खरीफ सीजन हेतु अरहर (तुवर) के उत्पादन का लक्ष्य 35.90 लाख टन से 4.30 लाख टन बढ़ाकर 40.20 लाख टन, उड़द के उत्पादन का लक्ष्य 21.60 लाख टन से 3.40 लाख टन बढ़ाकर 25 लाख टन निर्धारित किया है। मूंग के उत्पादन का लक्ष्य 44.80 लाख टन नियत किया गया है जो गत वर्ष से 10 हजार टन कम है।
सरकार का कहना है कि उसके पास दलहनों का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है और यदि अलनीनो के प्रकोप तथा कमजोर मानसून के कारण खरीफ कालीन दलहनों के उत्पादन में कुछ कमी आती है तो घरेलू बाजार में आपूर्ति की सामान्य गति बनाए रखने के लिए इस बफर स्टॉक का प्रभावी ढंग से इस्तेमाल किया जा सकता है।
यहां एक बात ध्यान में रखने लायक है कि सरकार के पास चना, तुवर, मूंग एवं मसूर का तो अच्छा-खासा स्टॉक मौजूद है लेकिन उड़द का स्टॉक कम है। म्यांमार एवं ब्राजील से उड़द का भारी आयात हो रहा है।
