राजस्थान के फ्लोर मिलर्स द्वारा सरकार से गेहूं की अंतर्राज्यीय खरीद की अनुमति देने की मांग
26-Jun-2026 05:00 PM
जयपुर। राजस्थान रोलर फ्लोर मिलर्स एसोसिएशन ने केन्द्र सरकार एवं भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) से खुले बाजार बिक्री योजना (ओएमएसएस) नीति में बदलाव करके रोलर फ्लोर मिलर्स को गेहूं की अंतर्राज्यीय खरीद की अनुमति देने का आग्रह किया है ताकि फ्लोर मिलर्स को किसी भी राज्य में स्थित खाद्य निगम के डिपो से गेहूं खरीदने का अवसर मिल सके। इससे गेहूं का उठाव बढ़ाने में मदद मिलेगी।
एसोसिशन के अध्यक्ष गोविन्द ग्रोवर का कहना है कि यद्यपि राजस्थान गेहूं के अग्रणी उत्पादक प्रांतों में शामिल है मगर केन्द्रीय पूल के लिए खरीद की दृष्टि से इसे ज्यादा महत्वपूर्ण राज्य नहीं माना जाता है। इसके फलस्वरूप राज्य के फ्लोर मिलर्स को गेहूं हासिल करने में अक्सर कई बाधाओं एवं चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। फ्लोर मिलर्स को प्रतिस्पर्धी मूल्य पर गेहूं खरीदने में कठिनाई होती है।
अध्यक्ष महोदय के अनुसार वर्तमान समय में ओएमएसएस के तहत गेहूं की अंतर्राज्यीय खरीद पर प्रतिबंध लगा हुआ है जिससे फ्लोर मिलर्स को उन स्थानों से इसकी खरीद में सफलता नहीं मिल पाती है जहां इसका भरपूर स्टॉक उपलब्ध रहता है। इससे प्रतिस्पर्धा के असमान धरातल का निर्माण हो जाता है।
पिछले दिनों राजस्थान रोलर फ्लोर मिलर्स एसोसिएशन की एक महत्वपूर्ण मिटिंग हुई थी जिसमें इस आशय के एक प्रस्ताव को सर्वसम्मित से स्वीकार किया गया कि सरकार से ओएमएसएस के तहत गेहूं की अंतर्राज्यीय खरीद की स्वीकृति देने पर विचार करने का आग्रह किया जाए। इस संदर्भ में खाद्य निगम के कार्यकारी निदेशक (बिक्री) को प्रेषित एक स्मार पत्र में एसोसिएशन के अध्यक्ष गोविन्द ग्रोवर ने कहा है कि सभी सक्षम एवं सुपात्र भागीदारों (फ्लोर मिलर्स प्रोसेसर्स) के लिए गेहूं की अंतर्राज्यीय खरीद की स्वीकृति दी जानी चाहिए और उसे देश के किसी भी भाग में स्थित एफसीआई के डिपो से इसकी खरीद की स्वतन्त्रता होनी चाहिए। इससे प्रतिस्पर्धा एवं पारदर्शिता बढ़ेगी।
राजस्थान को प्रोक्योरमेंट स्टेट का दर्जा देने की मांग
एसोसिएशन ने सरकार से रोलर फ्लोर मिलर्स को गेहूं की अंतर्राज्यीय खरीद की अनुमति देने अथवा राजस्थान को 'खरीद राज्य' (प्रोक्योरमेंट स्टेट) की श्रेणी में रखने का आग्रह किया है। गोविन्द ग्रोवर के अनुसार यद्यपि राजस्थान गेहूं का एक प्रमुख उत्पादक राज्य है जहां इस वर्ष केन्द्रीय पूल के लिए किसानों से 27 लाख टन से ज्यादा गेहूं खरीदा गया है लेकिन भारतीय खाद्य निगम की खरीदारी ज्यादा गेहूं खरीदा गया है लेकिन भारतीय खाद्य निगम की खरीदारी की स्पष्ट पात्रता नहीं होने के कारण पंजाब तथा हरियाणा से सटे इस प्रान्त को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। हालांकि 'सूचना के अधिकार' के अंतर्गत राजस्थान के जीएम कार्यालय से इसकी सूचना देने का आग्रह किया गया है मगर अभी तक वहां से कोई रिस्पांस नहीं मिला है।
एसोसिएशन ने सुझाव दिया है कि खुले बाजार बिक्री योजना में देश के सभी राज्यों को केवल खरीदी वाले राज्य से ही टेंडर देने के लिए नियम बनाने एवं लागू करने से सरकार को अरबों रुपए की बचत हो सकती हैं इसलिए इस पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
एसोसिएशन के अध्यक्ष ने जोर देकर कहा है कि पंजाब, मध्य प्रदेश एवं हरियाणा के बाद राजस्थान केन्द्रीय पूल में गेहूं का योगदान देने वाला चौथा सबसे प्रमुख राज्य है इसलिए इसे प्रोक्योरमेंट स्टेट का वैधानिक दर्जा मिलना चाहिए अथवा इसे इंटरस्टेट बिडिंग की अनुमति दी जानी चाहिए। ओएमएसएस के टेंडर भी केवल खरीदी वाले राज्य से ही दिए जाने चाहिए।
एक और महत्वपूर्ण सुझाव के तहत एसोसिएशन ने कहा है कि समूचे देश के फ्लोर मिलर्स को खरीद राज्य में गेहूं की खरीद करने पर मंडी शुल्क से छूट दी जानी चाहिए ताकि सभी खरीदार इसका स्टॉक बनाने में सक्षम हो जाए और बार-बार की खरीद से उसे राहत मिल सके।
