क्रूड ऑयल के बाद अब कमजोर मानसून की चिंता

26-Jun-2026 08:18 PM

नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में उत्पन्न संकट के कारण क्रूड खनिज तेल, प्राकृतिक गैस एवं रासायनिक उर्वरकों का आयात खर्च बढ़ने से भारतीय अर्थव्यवस्था पर मार्च 2026 से ही दबाव पड़ रहा था।

यह संकट अभी पूरी तरह टला भी नहीं है कि भारत के समक्ष एक और गंभीर चुनौती उत्पन्न हो गई है। अल नीनो के प्रभाव से दक्षिण-पश्चिम मानसून के कमजोर पड़ने के कारण देश में वर्षा की स्थिति अनिश्चित तथा अनियमित हो गई है।

इससे कृषि उत्पादन पर प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका है। उत्पादन में कमी आने पर न केवल ग्रामीण क्षेत्र की अर्थ व्यवस्था प्रभावित होगी बल्कि एफएमसीजी कंपनियों के विकास-विस्तार पर कुछ हद तक ब्रेक भी लग सकता है।

किसानों की आमदनी घटेगी तो क्रय क्षमता पर असर पड़ेगा और अनेक उत्पादों की मांग कमजोर पड़ जाएगी। मानसून की वर्षा खरीफ के साथ-साथ रबी सीजन की फसलों के लिए भी बहुत महत्वपूर्ण, आवश्यक एवं उपयोगी होती है।