मध्य प्रदेश में उत्पादित चावल को बासमती की श्रेणी में शामिल करने की मांग
26-Jun-2026 08:12 PM
नई दिल्ली। मध्य प्रदेश में उत्पादित लम्बे दाने वाले सुगंधित चावल को मूल बासमती की सूची में शामिल करने का मामला एक बार फिर तूल पकड़ने लगा है। मध्य प्रदेश चाहता है कि उसके खास किस्म के चावल को बासमती के भौगोलिक संकेतक (जीआई) का दर्जा दिया जाए। दूसरी ओर अखिल भारतीय चावल निर्यातक संघ (ऐरिया) मध्य प्रदेश की इस मांग का परोक्ष रूप से विरोध कर रहा है। उसका कहना है कि बासमती धान की खेती के लिए जो क्षेत्र पहले से ही चिन्हित या निश्चित हैं उसका अब विस्तार नहीं किया जाना चाहिए।
उल्लेखनीय है कि पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, दिल्ली तथा जम्मू कश्मीर के दो जिलों में उत्पादित लम्बे दाने वाले खुसबूदार चावल को ही बासमती का दर्जा प्राप्त है और ऐरिया यथा स्थिति बनाए रखने के पक्ष में है। उधर मध्य प्रदेश का कहना है कि उसके कुछ जिलों में उत्पादित खास किस्म के चावल में वे तमाम विशेषताएं मौजूद हैं जो अन्य राज्यों में उत्पादित बासमती चावल में पाई जाती हैं।
चालू सप्ताह के आरंभ में हरियाणा के सोनीपत में ऑल इंडिया राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन की आम सभा की बैठक आयोजित हुई थी जिसमें यह संकल्प पारित किया गया कि बासमती जीआई के लिए नए क्षेत्रों को शामिल करने का विरोध किया जाएगा। यह संकल्प मध्य प्रदेश की लम्बे समय से चली आ रही मांग को सीधी चुनौती देने वाला है। यह संकल्प इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे बासमती चावल के व्यापारी एवं निर्यातक मध्य प्रदेश के दावे को कहा खारिज कर रहे हैं।
दिलचस्प तथ्य यह है कि कुछ व्यापारी और निर्यातक पहले मध्य प्रदेश के दावे का समर्थन कर रहे थे मगर ऐरिया की मीटिंग में जब संकल्प पारित हो रहा था तब उन्होंने भी कोई विरोध या एतराज व्यक्त नहीं किया। वैश्विक बाजार में चावल को बासमती के रूप में मान्यता केवल परम्परागत क्षेत्रों में उत्पादित उत्पाद तक ही सीमित है। मध्य प्रदेश इसमें शामिल नहीं है।
