मानसून में सुधार के बावजूद वर्षा की कमी से खरीफ फसलों की बिजाई प्रभावित
26-Jun-2026 07:11 PM
नई दिल्ली। हालांकि पिछले कुछ दिनों से दक्षिण-पश्चिम मानसून की स्थिति में सुधार देखा जा रहा है लेकिन अब भी सामान्य औसत की तुलना में वर्षा की कमी 41 प्रतिशत से अधिक बनी हुई है। कई प्रमुख कृषि उत्पादक राज्यों में मानसून अभी पहुंचा नहीं है जबकि जून का महीना समाप्त होने वाला है।
कम से कम चालू माह के दौरान मानसूनी वर्षा की कमी का यह अंतर समाप्त होना मुश्किल लगता है इसलिए अनेक देशों में खरीफ फसलों की बिजाई शुरू होने में स्वाभाविक रूप से देर हो जाएगी। देश के पश्चिमी तथा मध्यवर्ती भाग में मानसून के आने में देर हो गई और इसके आगे बढ़ने की गति भी धीमी देखी जा रही है।
इसके चलते वहां धान, कपास, दलहन, प्याज तथा टमाटर आदि की खेती में बाधा पड़ रही है। महाराष्ट्र में सामान्य औसत क्षेत्रफल की तुलना में महज 1-2 प्रतिशत भाग में ही फसलों की बिजाई संभव हो पाई है। इसके तहत खासकर धान और कपास की खेती काफी पिछड़ रही है।
मानसून की बारिश में आए सुधार की वजह से आगामी सप्ताहों के दौरान खरीफ फसलों की बिजाई की रफ्तार कुछ बढ़ने की उम्मीद है लेकिन इसका उत्पादन काफी हद तक जुलाई एवं अगस्त की वर्षा पर निर्भर रहेगा। मौसम विभाग कह रहा है कि मध्य जुलाई के बाद मानसून कई दिनों तक सुस्त रह सकता है। देश के विभिन्न भागों में चालू माह के दौरान वर्षा का वितरण काफी हद तक असमान रहा है।
देश में 65-70 प्रतिशत बारिश दक्षिण-पश्चिम मानसून सीजन के दौरान होती है और इसमें भी सर्वाधिक वर्षा जुलाई तथा अगस्त के दो महीनों में होने की परिपाटी रही है। इस वर्ष 1 से 25 जून के बीच देश में सामान्य औसत के मुकाबले करीब 41 प्रतिशत कम वर्षा हुई है जबकि आगे का परिदृश्य भी उत्साहवर्धक नहीं लगता है।
छत्तीसगढ़, झारखंड, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश एवं उड़ीसा जैसे राज्यों में बारिश की भारी कमी देखी गई जिससे वहां खरीफ फसलों की बिजाई बहुत ही धीमी गति से हो रही है। इसमें गुजरात और तेलंगाना भी शामिल है।
