रबी जिंसों का कमजोर भाव
11-Jul-2026 11:45 AM
खरीफ कालीन फसलों पर अल नीनो, कमजोर मानसून एवं खाद-बीज के संकट का बादल मंडरा रहा है जिससे कुछ महत्वपूर्ण जिंसों का उत्पादन प्रभावित होने की आशंका है। दूसरी ओर रबी कालीन जिंसों का बाजार भाव न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की तुलना में 3 से 8 प्रतिशत तक नीचे चल रहा है।
मक्का का दाम तो एमएसपी से 24 प्रतिशत नीचे आ सकता है। रबी सीजन के तीन महत्वपूर्ण उत्पाद- चना, मसूर एवं जौ की कीमत एमएसपी से नीचे है। लेकिन सरसों का भाव काफी ऊपर चल रहा है जिससे इसकी खेती में रबी सीजन के दौरान किसानों का उत्साह एवं आकर्षण बढ़ने की उम्मीद है।
गेहूं का थोक मंडी भाव न्यूनतम समर्थन मूल्य के आसपास ही चल रहा है। किसानों की दृष्टि से मक्का का प्रदर्शन सबसे कमजोर माना जा रहा है। गेहूं तथा मसूर का दाम लगभग सामान्य चल रहा है।
सरसों का एमएसपी 6200 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित है जबकि इसका औसत थोक मंडी भाव इससे 8 प्रतिशत ऊपर या 6674 रुपए प्रति क्विंटल चल रहा था। यह भाव अप्रैल-जून की तिमाही का औसत स्तर है जबकि अब यह और भी उछलकर 7227 रुपए प्रति क्विंटल हो गया है जो एमएसपी से 17 प्रतिशत ऊंचा है।
8 जुलाई तक के आंकड़ों का विश्लेषण करने से ज्ञात होता है कि गेहूं को छोड़कर अन्य रबी फसलों का भाव पिछली तिमाही के औसत स्तर से ऊंचा हो गया। इससे किसानों को राहत मिल रही है।
अप्रैल-जून की तिमाही में रबी फसलों की जोरदार कटाई-तैयारी एवं थोक मंडियों में आवक होती है इसलिए कीमतों पर कुछ दबाव रहता है। अब आपूर्ति का ऑफ सीजन शुरू होने वाला है जबकि मांग मजबूत रहने की उम्मीद है। आगे त्यौहारी सीजन आने वाला है जिससे विभिन्न जिलों की खपत एवं कीमत बढ़ सकती है। चना की खपत त्यौहारी सीजन में अक्सर तेजी से बढ़ जाती है। रबी फसलों की बिजाई पर इसका सकारात्मक असर पड़ेगा।
