चीनी मिलों को मासिक कोटे का कम से कम 90 प्रतिशत मात्रा बेचने का निर्देश

11-Jul-2026 01:27 PM

नई दिल्ली। घरेलू प्रभाग में चीनी की आपूर्ति एवं उपलब्धता की स्थिति को सुगम बनाए रखने तथा कीमतों में तेजी पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से केन्द्र सरकार ने उद्योग पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग ने चीनी मिलों के स्टॉक की धारिता की सीमा पर काफी सख्त नियम लागू कर दिया है।

इसके तहत मिलों को प्रत्येक माह नियत फ्री सेल कोटे के कम से कम 90 प्रतिशत भाग की आपूर्ति बाजार में अनिवार्य रूप से करने का निर्देश दिया गया है। नए नियम के अनुसार यदि मिलर्स किसी एक माह में इस नियत स्तर से कम चीनी की बिक्री करते हैं तो अगले महीने के उसके कोटे में आनुपातिक कटौती कर दी जाएगी। 

खाद्य मंत्रालय ने सभी चीनी मिलों को पत्र के माध्यम से इस नियम और निर्णय की सूचना भेज दी है। पहले यदि मिलर्स निर्धारित कोटे के 90 प्रतिशत भाग से कम चीनी बेचते थे तब भी उसे किसी दंड का सामना नहीं करना पड़ता था। इस दंड या सजा से बचने के लिए मिलर्स को उस माह की 20 तारीख तक सरकार को इसकी सूचना देनी पड़ती थी। लेकिन सरकार ने अब इस प्रावधान को खत्म कर दिया है। 

सभी चीनी मिलों को सूचित किया जाता है कि यदि कोई चीनी मिल या मिल समूह द्वारा किसी एक माह में नियत फ्री सेल कोटे के सापेक्ष 90 प्रतिशत से कम चीनी डिस्पैच की जाती है तो अगले महीने उसे उसी प्रतिशत मात्रा में चीनी का कोटा आवंटित किया जाएगा जितनी मात्रा का वास्तव में उपयोग किया गया है।

इसका मतलब यह हुआ कि अगर कोई प्लांट किसी महीने में 80 प्रतिशत कोटा का उपयोग करता है तो अगले महीने उसे 80 प्रतिशत कोटा ही आवंटित किया जाएगा। सरकार का यह नियम 9 जुलाई 2026 से प्रभावी हो चुका है और अगली सूचना तक लागू रहेगा। अगले महीने से त्यौहारी सीजन आरंभ होने जा रहा है जिसमें चीनी की मांग एवं खपत बढ़ सकती है।

यदि मार्केट में आपूर्ति की स्थिति जटिल हुई तो कीमतों में उछाल आने की संभावना रहेगी। मध्य जून के बाद से ही चीनी का घरेलू बाजार भाव ऊंचा एवं मजबूत बना हुआ है।