पैदावार घटने से लालमिर्च की आपूर्ति में जटिलता के संकेत

27-Feb-2026 03:10 PM

गुंटूर। भारतीय मसाला बाजार में फ़िलहाल मिश्रित माहौल देखा जा रहा है। लालमिर्च के उत्पादन में 35-40 प्रतिशत की जोरदार गिरावट आने की आशंका व्यक्त की जा रही है जिससे इसकी आपूर्ति एवं उपलब्धता की स्थिति जटिल (टाईट) रहने की सम्भावना है। दूसरी ओर गत वर्ष कीमतों में सुधार आने से इस बार हल्दी का उत्पादन बेहतर होने की उम्मीद है। इसके अलावा अदरक (सौंठ) के निर्यात बाजार में अनिश्चितता एवं उतार-चढ़ाव की स्थिति देखी जा रही है क्योंकि चीन इसके वैश्विक निर्यात बाजार पर लगातार अपनी पकड़ मजबूत कर रहा है।

भारत दुनिया में लालमिर्च का सबसे प्रमुख उत्पादक एवं निर्यातक देश है जहां इसका औसत वार्षिक उत्पादन 20 लाख टन के आसपास होता है। लेकिन चालू सीजन (2025-26) के दौरान इसके उत्पादन में 35-40 प्रतिशत तक की भारी गिरावट आने की सम्भावना है क्योंकि एक तो आंध्र प्रदेश, तेलंगाना एवं कर्नाटक जैसे शीर्ष उत्पादक राज्यों में इसका बिजाई क्षेत्र घट गया और दूसरे मौसम की हालत भी फसल के लिए पूरी तरह अनुकूल नहीं रही। लालमिर्च की बिजाई भी अक्टूबर-नवम्बर के लिए पूरी तरह अनुकुल नहीं रही। लालमिर्च की बिजाई भी अक्टूबर-नवम्बर तक हल्की रही। कुछ क्षेत्रों में पहली बिजाई वाली फसल क्षतिग्रस्त हो गयी। अब इसकी तुड़ाई-तैयारी आरम्भ हो गयी है मगर मंडियों में आवक उम्मीद से कम हो रही है। इससे हाजिर मंडियों में स्थिति जटिल देखी जा रही है।

हालांकि लालमिर्च का पिछला बकाया स्टॉक गत वर्ष की तुलना में इस बार 8-10 प्रतिशत ऊंचा बताया जा रहा है लेकिन व्यापार विश्लेषकों का कहना है कि इसकी वास्तविक उपलब्धता में 25-30 प्रतिशत की कमी आ सकती है। पिछले साल ऊंचे स्टॉक के कारण आरंभिक महीनों में लालमिर्च का भाव नरम पड़ गया था। लेकिन उसके बाद जनवरी 2026तक यह मजबूत बना रहा। लालमिर्च की निर्यात मांग नियमित रूप से मजबूत बनी रही और चीन इसका प्रमुख खरीदार बना रहा।