पश्चिम एशिया में संकट से रूई का आयात प्रभावित

26-Mar-2026 10:32 AM

मुम्बई। पश्चिम एशिया में इजरायल एवं अमरीका के साथ ईरान का भयंकर युद्ध जारी रहने से भारत में अन्य उत्पादों के साथ रूई का आयात भी प्रभावित हो रहा है जिससे घरेलू प्रभाग में इसकी आपूर्ति जटिल होने लगी है और कीमतों में तेजी-मजबूती का माहौल बनने लगा है। हालांकि सरकारी एजेंसी- भारतीय कपास निगम (सीसीआई) के पास रूई का भारी-भरकम स्टॉक मौजूद है मगर उसमें अधिकांश मात्रा मीडियम रेशे वाली रूई की है जबकि टेक्सटाइल उद्योग विदेशों से लम्बे रेशेवाली रूई का ज्यादा आयात करता है। 

अच्छी क्वालिटी की रूई की आपूर्ति सीमित होने तथा कीमत बढ़ने से स्वदेशी स्पिनिंग इकाइयों एवं टेक्सटाइल मिलों की व्यावसायिक गतिविधियों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है जिससे भारत से कॉटन यार्न, फैब्रिक्स एवं सूती वस्त्र परिधानों का निर्यात प्रभावित हो सकता है।

कपास का घरेलू उत्पादन बढ़ाने के लिए सरकार विशेष स्कीम चला रही है मगर इसका कोई खास सार्थक परिणाम सामने नहीं आ रहा है। कपास का उत्पादन घटता जा रहा है। 2025-26 के मौजूदा मार्केटिंग सीजन के दौरान कपास का घरेलू उत्पादन घटकर 290 लाख गांठ के आसपास सिमट जाने का अनुमान लगाया गया है। पिछले तीन सीजन से उत्पादन में लगातार गिरावट आ रही है। भारत में अमरीका, ब्राजील एवं दक्षिण अफ्रीका सहित कई अन्य देशों से अच्छी क्वालिटी की रूई का आयात किया जाता है।