पश्चिम एशिया को धीमी गति से कृषि उत्पादों का निर्यात शुरू

23-Mar-2026 12:14 PM

मुम्बई। ईरान-अमरीका युद्ध, होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने तथा मध्य पूर्व एवं खाड़ी क्षेत्र के विभिन्न देशों पर होने वाले हमले के कारण पश्चिम एशिया में कुछ समय के लिए भारतीय कृषि उत्पादों का निर्यात ठप्प पड़ गया था लेकिन अब शिपमेंट दोबारा आरंभ हो गया है। वैसे उसकी गति अभी धीमी बनी हुई है।

जहाजों के आवागमन में कठिनाई के साथ-साथ किराया भाड़ा में हो रही बढ़ोत्तरी भी निर्यातकों के लिए एक गंभीर चुनौती बनी हुई है। शिपिंग कंपनियां इसे घटाने को तैयार नहीं हैं।

इसी तरह सुरक्षा की अनिश्चित स्थिति के कारण दुबई के रास्ते सऊदी अरब एवं कतर आदि को फलों एवं सब्जियों जैसे जल्दी खराब होने वाले (पेरिशेबल) कृषि उत्पादों के शिपमेंट में बाधा उत्पन्न हो रही है।

उल्लेखनीय है कि भारत से खाड़ी देशों को बागवानी उत्पादों का जो निर्यात होता है उसका अधिकांश भाग दुबई से ही होकर गुजरता है। भारतीय उत्पाद पहले दुबई पहुंचता है और फिर वहां से विभिन्न देशों को भेजा जाता है।

एक निर्यातक के अनुसार प्याज एवं सब्जियों की कुछ खेपों को खोरफक्कन, फ़ुजैराह, दुबई एवं मस्कट भेजा गया है। कार्गो का मूवमेंट धीमा है जबकि किराया बहुत बढ़ गया है।

ध्यान देने वाली बात है कि दुबई के कस्टम विभाग ने चालू माह (मार्च) के आरंभ में एक अस्थाई एवं वैकल्पिक सुविधा आरंभ की थी।

इसके तहत जो जहाज जेबेल अली बंदरगाह पर पहुंचने वाला था उसे खोरफक्कन एवं फ़ुजैराह पर भेजा जाता है और वहां से कंटेनरों को सड़क मार्ग से गंतव्य देशों तक पहुंचाया जाता है।

भारत से ईरान को तीन जहाजों में बासमती चावल भेजा गया था जो पिछले कई दिनों से बंदर अब्बास बंदरगाह के पास लंगर डाले खड़ा है। उसे पोर्ट पर बर्थ नहीं मिल रहा है।