रूई पर आयात शुल्क कम या खत्म करने पर विचार
29-Apr-2026 03:41 PM
नई दिल्ली। केन्द्र सरकार रूई के आयात पर लागू सीमा शुल्क को कम या खत्म करने के प्रस्ताव पर विचार कर रही है। पश्चिम एशिया में अशांति का माहौल होने से न केवल रूई के आयात में बाधा पड़ रही है बल्कि इसका खर्च भी ऊंचा हो गया है। इससे स्वदेशी वस्त्र उद्योग को काफी कठिनाई हो रही है। सीमा शुल्क समाप्त होने पर उद्योग को कुछ राहत मिलेगी।
उल्लेखनीय है कि भारतीय वस्त्र उद्योग अधिकांशतः घरेलू रूई का ही उपयोग करता है लेकिन इसे लम्बे रेशे एवं उच्च क्वालिटी वाली रूई का आयात अमरीका, मिस्र, ऑस्ट्रेलिया एवं ब्राजील जैसे देशों से करना पड़ता है। भारत स्वयं रूई का एक अग्रणी उत्पादक देश है।
केन्द्रीय कपड़ा मंत्रालय के एक वरिष्ठ आधिकारी का कहना है कि रूई के आयात पर सीमा शुल्क में कटौती या समाप्ति के मुद्दे पर केन्द्रीय कृषि मंत्रालय एवं वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग के साथ विचार-विमर्श किया जा रहा है। कपड़ा मंत्रालय ने रेयॉन ग्रेड के वुड पल्स (लकड़ी की लुग्दी) पर लागू 2.5 प्रतिशत के आयात शुल्क को भी वापस लेने का सुझाव किया है। इसका उपयोग विस्कोस स्टैपल फाइबर एवं फिलामेंट यार्न के निर्माण में होता है। इसका आयात अमरीका, कनाडा, ब्राजील एवं इंडोनेशिया जैसे देशों से किया जाता है।
कमजोर वैश्विक मांग एवं कीमतों पर दबाव के कारण भारत से रेडीमेट वस्त्र-परिधानों का निर्यात वित्त वर्ष 2024-25 के 15.99 अरब डॉलर से घटकर वित्त वर्ष 2025-26 में 15.77 अरब डॉलर रह गया। केन्द्र सरकार ने पहले 19 अगस्त से 30 सितम्बर 2025 तक रूई के आयात को शुल्क मुक्त किया था और बाद में इसकी समयसीमा को 31 दिसम्बर 2025 तक बढ़ा दिया था। 1 जनवरी 2026 से रूई पर आयात शुल्क पुनः लागू हो गया।
