News Capsule/न्यूज कैप्सूल: मानसून पर अनिश्चितता बरकरार, तूर और मोटे अनाज पर सबसे अधिक दबाव: क्रिसिल

13-Jul-2026 10:18 AM

News Capsule/न्यूज कैप्सूल: मानसून पर अनिश्चितता बरकरार, तूर और मोटे अनाज पर सबसे अधिक दबाव: क्रिसिल

★ जुलाई के शुरुआती दिनों में अच्छी बारिश से जून के सूखे हालात के बाद राहत जरूर मिली है, लेकिन खरीफ फसलों पर जोखिम अभी भी पूरी तरह टला नहीं है। रेटिंग एजेंसी क्रिसिल ने अपनी नई Deficient Rainfall Impact Parameter (DRIP) रिपोर्ट में कहा है कि वर्षा का असमान वितरण, अल नीनो की आशंका और खरीफ बुवाई में देरी कृषि क्षेत्र के लिए चिंता का विषय बने हुए हैं।

★ क्रिसिल के अनुसार 8 जुलाई तक के DRIP आकलन में कर्नाटक, बिहार, उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में वर्षा की कमी के कारण कृषि पर सबसे अधिक दबाव दिखाई दे रहा है, जबकि हरियाणा में अपेक्षाकृत हल्का दबाव है। यह संकेतक वर्षा की कमी के साथ-साथ सिंचाई उपलब्धता को भी शामिल कर राज्यों और फसलों पर वास्तविक प्रभाव का आकलन करता है। DRIP स्कोर जितना अधिक होगा, कृषि उत्पादन पर वर्षा की कमी का जोखिम उतना ही अधिक माना जाएगा।

★ सबसे अधिक दबाव तूर (अरहर) और मोटे अनाज पर है। इसके विपरीत बेहतर सिंचाई सुविधा के कारण गन्ना अपेक्षाकृत सुरक्षित स्थिति में है, जबकि मूंगफली और सोयाबीन भी अन्य फसलों की तुलना में कम प्रभावित दिखाई दे रहे हैं। बाजरा, मक्का और धान पर दबाव तूर की तुलना में कम आंका गया है।

★ जुलाई में हुई व्यापक वर्षा से देश में वर्षा घाटा कम हुआ है, लेकिन भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने पूरे जुलाई में सामान्य से लगभग 6 प्रतिशत कम वर्षा का अनुमान जताया है। इसका अर्थ है कि महीने के दूसरे पखवाड़े में बारिश कमजोर पड़ सकती है। ऐसे में मानसून की आगे की प्रगति खरीफ फसलों की वृद्धि और उत्पादन के लिए निर्णायक रहेगी।

★ केवल मानसून का तेजी से आगे बढ़ना पर्याप्त नहीं है। कृषि के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात वर्षा की मात्रा, उसका भौगोलिक वितरण और सही समय पर बारिश होना है। यदि आने वाले सप्ताहों में वर्षा असमान रही या लंबे शुष्क अंतराल बने, तो खरीफ उत्पादन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था दोनों पर दबाव बढ़ सकता है।