News Capsule/न्यूज कैप्सूल: जुलाई की बारिश से खरीफ फसलों को मिली राहत, लेकिन अल नीनो का खतरा अभी टला नहीं
13-Jul-2026 10:15 AM
News Capsule/न्यूज कैप्सूल: जुलाई की बारिश से खरीफ फसलों को मिली राहत, लेकिन अल नीनो का खतरा अभी टला नहीं
★ जुलाई के पहले सप्ताह में मानसून की जोरदार वापसी से देश में वर्षा की कमी तेजी से घटी है, जिससे खरीफ फसलों की बुवाई और उत्पादन को लेकर उम्मीदें बढ़ी हैं। हालांकि कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि अल नीनो का खतरा अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है और जुलाई-अगस्त का मौसम फसलों के लिए बेहद महत्वपूर्ण रहेगा।
★ जून के अंत तक देश में वर्षा की कमी लगभग 40 प्रतिशत थी, जो जुलाई के पहले सप्ताह में अच्छी बारिश के बाद 9 जुलाई तक घटकर करीब 12 प्रतिशत रह गई। इसके बावजूद कई जिलों में वर्षा अब भी सामान्य से कम है और खरीफ बुवाई पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 20 प्रतिशत पीछे चल रही है। धान, कपास और तिलहनों के रकबे में सबसे अधिक कमी दर्ज की गई है।
★ केवल कुल वर्षा के आंकड़ों से स्थिति का आकलन नहीं किया जा सकता। अधिक महत्वपूर्ण यह है कि बारिश किस क्षेत्र में, कितनी समान रूप से और फसल की किस अवस्था में होती है। उनका मानना है कि अल नीनो जुलाई और अगस्त में और मजबूत हो सकता है, जबकि इसका सबसे अधिक असर अक्टूबर-नवंबर में देखने को मिल सकता है।
★ जुलाई के पहले सप्ताह की व्यापक और संतुलित वर्षा उत्तर भारत में खरीफ बुवाई को गति देगी तथा दक्षिण और पश्चिम भारत में पहले से बोई गई फसलों की वृद्धि में मदद करेगी। हालांकि उन्होंने चेतावनी दी कि यदि आगे लंबा शुष्क दौर रहा तो पैदावार प्रभावित हो सकती है।
★ सरकार को जिला स्तर पर आकस्मिक योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करना होगा। इसमें कम अवधि और सूखा सहनशील बीजों की उपलब्धता, सिंचाई के लिए डीजल, जल प्रबंधन, पशुओं के लिए चारा एवं पानी तथा किसानों को समय पर मौसम संबंधी सलाह उपलब्ध कराना प्रमुख प्राथमिकताएं होनी चाहिए।
★ यदि जुलाई से सितंबर के दौरान वर्षा का वितरण संतुलित रहा तो खरीफ फसलों की स्थिति में उल्लेखनीय सुधार संभव है। लेकिन यदि वर्षा असमान रही या लंबे सूखे अंतराल बने, तो विशेष रूप से वर्षा आधारित क्षेत्रों में तिलहन, दलहन और कपास की उत्पादकता प्रभावित हो सकती है।
