News Capsule/न्यूज कैप्सूल: अरहर की कमजोर बुवाई से हरी मसूर में प्रतिस्पर्धा तेज, मटर बाजार नरम, चने में स्थिरता

27-Jul-2026 03:10 PM

News Capsule/न्यूज कैप्सूल: अरहर की कमजोर बुवाई से हरी मसूर में प्रतिस्पर्धा तेज, मटर बाजार नरम, चने में स्थिरता
★ वैश्विक दलहन बाजार में इस समय हरी मसूर (ग्रीन लेंटिल) के निर्यातक देशों के बीच प्रतिस्पर्धा तेज हो गई है। इसकी प्रमुख वजह भारत में खरीफ अरहर (तुअर) की कमजोर बुवाई और संभावित कम उत्पादन की आशंका है, जिससे भारतीय उपमहाद्वीप में आयात मांग बढ़ने की उम्मीद की जा रही है।
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अरहर की कम बुवाई से हरी मसूर को मिल सकता है समर्थन
★ प्रमुख उत्पादक राज्यों में अरहर के रकबे में आई गिरावट की भरपाई अन्य राज्यों में नहीं हो पाएगी। इससे पिछले वर्ष की तुलना में कुल उत्पादन घटने की आशंका बढ़ गई है।
★ 17 जुलाई तक उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, अरहर का रकबा पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 5 लाख हेक्टेयर से अधिक कम था। इस वर्ष अरहर का कुल रकबा 44.6 लाख हेक्टेयर से घटकर लगभग 40.1 लाख हेक्टेयर रह सकता है। यदि ऐसा होता है तो भारत की आयात आवश्यकता बढ़ सकती है, जिससे हरी मसूर के वैश्विक बाजार को समर्थन मिलने की संभावना है।
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मटर की कीमतों में नरमी
★ वैश्विक मटर (फील्ड पी) बाजार सप्ताह के अंत में नरम रुख के साथ बंद हुआ। अल्पकालिक मांग कमजोर रहने और नई फसल से पहले किसानों द्वारा अपने पुराने स्टॉक की बिक्री बढ़ाने से कीमतों पर दबाव बना हुआ है।
★ हालांकि कनाडा के सस्केचेवान प्रांत में फील्ड पी की फसल सामान्य से कुछ पीछे चल रही है, लेकिन पर्याप्त मिट्टी की नमी के कारण औसत से बेहतर उत्पादन की उम्मीद जताई जा रही है।
★ वहीं, फसल रोगों को लेकर चिंता बनी हुई है। सस्केचेवान कृषि विभाग के अनुसार, हाल के सप्ताह में गर्म और शुष्क मौसम से फसल की बढ़वार में सुधार हुआ है।
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काबुली चना बाजार स्थिर, किसानों की सीमित बिक्री
★ वैश्विक चना बाजार में फिलहाल कोई बड़ा बदलाव नहीं देखा गया है। अधिकांश निर्यातक और प्रोसेसर किसानों की सीमित बिक्री के कारण आक्रामक खरीद से बच रहे हैं।
★ बाजार को उम्मीद है कि नवंबर तक रमजान मनाने वाले देशों से देसी चना और छोटे आकार के काबुली चने की मांग बढ़ सकती है, जिससे निर्यात को समर्थन मिलेगा।
★ हालांकि व्यापारियों की चिंता मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव को लेकर भी है। होर्मुज जलडमरूमध्य और बाब-अल-मंदेब मार्ग में संभावित व्यवधान से एशिया और यूरोप के बीच समुद्री व्यापार प्रभावित हो सकता है, जिससे दलहन के वैश्विक शिपमेंट और माल ढुलाई लागत पर असर पड़ने की आशंका है।