मध्यवर्ती भारत में मानसून की स्थिति कमजोर पड़ने के संकेत
10-Jul-2026 06:00 PM
नागपुर। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के आंकड़ों से पता चलता है कि इस वर्ष 8 जुलाई को देश में 12.2 मि०मी० बारिश हुई जो सामान्य औसत स्तर 8.8 मि०मी० से 59 प्रतिशत ज्यादा रही। लेकिन 1 जून से 8 जुलाई 2026 के दौरान राष्ट्रीय स्तर पर कुछ वर्षा घटकर 195.5 मि०मी० पर अटक गई जो दीर्घकालीन औसत (एलपीए) 230.4 मि०मी० से 15 प्रतिशत कम रही।
चालू माह के शुरुआती 8 दिनों के दौरान देश के मध्यवर्ती एवं पश्चिमोत्तर भाग में सामान्य औसत से अधिक बारिश दर्ज की गई जहां क्रमश: 18.5 मि०मी० तथा 9.5 मि०मी० वर्षा हुई। पूर्वी एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र में 11.6 मि०मी० बरसात हुई जो सामान्य औसत के लगभग बराबर रही। दक्षिण भारत में भी 6.3 मि०मी० की सामान्य वर्षा रिकॉर्ड की गई।
मौसम विभाग के मुताबिक मध्यवर्ती भारत में मानसून पिछले कुछ दिनों से सक्रिय था लेकिन अब इसकी सक्रियता, गतिशीलता एवं तीव्रता काफी घटने की संभावना है। इससे महाराष्ट्र, कर्नाटक, गुजरात, मध्य प्रदेश एवं छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में मानसून की चाल सुस्त पड़ गई है और अगले कुछ दिनों तक सुस्त ही बनी रह सकती है।
पिछले दिनों की जोरदार वर्षा से महाराष्ट्र के कई दिनों में किसानों को अब खरीफ फसलों की बिजाई में अच्छी सहायता मिलने की उम्मीद है। गुजरात, महाराष्ट्र और राजस्थान जैसे प्रांतों में खरीफ फसलों का रकबा गत वर्ष से काफी पीछे चल रहा है।
मौसम विभाग के मुताबिक मध्य प्रदेश के पश्चिमोत्तर भाग और इससे सटे उत्तर प्रदेश के हिस्सों के ऊपर एक पूर्व व्यवस्थित कम दाब का क्षेत्र बना हुआ था जो अब उत्तर प्रदेश के पश्चिमी क्षेत्र की और बढ़ रहा है। इसे देखते हुए मौसम विभाग ने अगले 24 घंटे में पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जोरदार बारिश का अलर्ट जारी किया है। इसके साथ-साथ आसपास के राज्यों में भी मूसलाधार वर्षा होने की संभावना है।
