मानसूनी वर्षा की कमी 42 प्रतिशत पर पहुंचने से खरीफ बिजाई में देरी
22-Jun-2026 03:45 PM
नई दिल्ली। दक्षिण-पश्चिम मानसून की गति सुस्त एवं सक्रियता कम रहने से राष्ट्रीय स्तर पर इस वर्ष बारिश की कमी सामान्य औसत स्तर की तुलना में 42 प्रतिशत पर पहुंच गयी है। इससे न केवल खरीफ फसलों की बिजाई में देरी हो रही है बल्कि उसकी उपज दर में गिरावट आने की आशंका भी बढ़ गयी है। हालात ज्यादा गंभीर होने पर किसानों के पास दो ही विकल्प मौजूद होंगे कि या तो खेतों को खासी छोड़ दिया जाए या फिर छोटी अवधि में पक कर तैयार होने वाली किसानों की फसलों की खेती पर ध्यान दिया जाए।
चालू वर्ष के दौरान वर्षा पर आश्रित देश के मध्यवर्ती राज्यों में अभी तक बारिश का प्रदर्शन निराशाजनक रहा है। प्राप्त सूचना के अनुसार सामान्य औसत के मुकाबले महाराष्ट्र में 82 प्रतिशत, झारखण्ड में 69 प्रतिशत, छत्तीसगढ़ में 67 प्रतिशत, मध्य प्रदेश में 48 प्रतिशत तथा उड़ीसा में 47 प्रतिशत कम बारिश हुई है। मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में सोयाबीन का सर्वाधिक उत्पादन होता है। यदि शीघे ही मानसून सक्रिय नहीं होता है और वर्षा की कमी का यह विशाल अंतर नहीं घटता है तो दलहन, तिलहन, धान एवं कपास जैसी फसलों की खेती में काफी देर हो सकती है।
जिन इलाकों में बारिश का सर्वाधिक अभाव बना हुआ है वहां अगर अगले दो सप्ताह के दौरान मानसून पूरी तरह सक्रिय नहीं होता है तो किसान सोयाबीन एवं मक्का जैसी फसलों की तरफ तेजी से आकर्षित हो सकते हैं क्योंकि इसकी परिपक्वता अधिक अपेक्षाकृत छोटी होती है।
महाराष्ट्र के मराठवाडा संभाग में किसान अभी बारिश की इन्तजार कर रहे हैं ताकि अरहर (तुवर) की बिजाई आरंभ की जा सके। लातूर के किसानों का कहना है कि अगर जुलाई के प्रथम सप्ताह तक अच्छी वर्षा नहीं हुई तो वे तुवर को छोड़कर सोयाबीन की बिजाई आरम्भ कर देंगे। सोयाबीन की फसल को पानी की अपेक्षाकृत कम जरुरत पड़ती है और इसकी अवधि भी छोटी होती है। मक्का के साथ भी यही स्थिति लागू होती है।
