मानसून के पश्चिमी तट एवं मध्य भारत की ओर बढ़ने के संकेत
22-Jun-2026 05:50 PM
तिरुअनंतपुरम। लगभग एक पखवाड़े तक ठहराव और सुस्त रहने के बाद दक्षिण-पश्चिम मानसून के सक्रिय होने तथा पश्चिमी तट एवं मध्यवर्ती भरता में आगे बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं। मौसम विभाग का कहना है कि मानसून अगले 36 से 48 घंटे के अन्दर मुंबई पहुंच सकता है। अपने आगमन के बाद मानसून पहली बार कुछ तेजी के साथ आगे बढ़ सकता है। इससे खासकर महाराष्ट्र, गुजरात, मध्य प्रदेश एवं छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में सूखे इस प्रभावित खेतों में नमी बढ़ेगी और किसानों को खरीफ फसलों की बिजाई की रफ़्तार बढ़ाने का अवसर मिल सकेगा। महाराष्ट्र में अभी तक इस बार मानसून की वर्षा का विवरण निराशाजनक रहा है।
मौसम विभाग के मुताबिक एक गुजरते मेडेन जुलियन ऑसिलेशन (एमजेओ) के प्रभाव से मानसून की सक्रियता बढ़ी है। हालांकि इससे भारी वर्षा होने की उम्मीद रहती है मगर अक्सर सीमित बारिश ही हो पाती है। पश्चिमी तट पर बरसार 10-12 जून को ही आरम्भ हो जानी चाहिए थी लेकिन इस बार मानसून काफी लेट हो गया। वैसे ख्रेफ़ फसलों की बिजाई के लिए अभी पर्याप्त समय बाकी है इसलिए इस बारिश से किसानों का उत्साह अवश्य बढ़ेगा। मध्यवर्ती भारत भी इस वर्ष से लाभान्वित होगा।
अरब सागर में हलचल तेज हो गयी है। वहां मानसून की शाखा का ढांचा मजबूत होने लगा है। थोड़ी-बहुत हलचल बंगाल की खाड़ी के ऊपर भी देखी जा रही है। वहां कम दाब का क्षेत्र बन रहा है। इससे मानसून को न केवल मजबूती मिलेगी बल्कि आगे बढ़ने का सहारा भी प्राप्त होगा। दक्षिण भारत के तमिलनाडु में वर्षा का दौर पहले से ही जारी है।
उपग्रह से प्राप्त चित्र से पता चलता है कि मानसून के बादलों का एक व्यवस्थिर एवं संगठित ट्रफ़ पश्चिमी तट की ओर पणजी एवं रत्नागिरी से आगे बढ़ते हुए मंगलोर, तटीय कर्नाटक एवं केरल होते हुए दक्षिण दिशा की ओर जा रहा है। लेकिन मुंबई के ऊपर केवल हल्के बादल ही कहीं-कहीं देखे जा रहे हैं। केरल में बादलों का ट्रफ़ त्रिशूर से लेकर तिरुअनंतपुरम तक फैला हुआ है।
