महाराष्ट्र में खरीफ फसलों के रकबे में 6 लाख हेक्टेयर से अधिक की गिरावट

26-Aug-2026 11:44 AM

मुम्बई। महाराष्ट्र के कुछ इलाकों में मानसून की पर्याप्त बारिश नहीं होने से खरीफ फसलों की बिजाई कुछ पिछड़ रही है। सितम्बर का मौसम खरीफ फसलों के उत्पादन में निर्णायक भूमिका निभा सकता है। राज्य में खरीफ फसलों की बिजाई का अभियान बिलकुल अंतिम चरण में पहुंच गया है। 

राज्य कृषि विभाग की नवीनतम साप्ताहिक रिपोर्ट के अनुसार महाराष्ट्र में इस वर्ष 24 अगस्त तक खरीफ फसलों का कुल उत्पादन क्षेत्र 138.30 लाख हेक्टेयर पर पहुंचा जो गत वर्ष की समान अवधि के बिजाई क्षेत्र 144.65 लाख हेक्टेयर से 6.35 लाख हेक्टेयर कम है। समीक्षाधीन अवधि दौरान राज्य में धान एवं मोटे अनाजों का संयुक्त उत्पादन क्षेत्र 34.22 लाख हेक्टेयर से लुढ़ककर 30.86 लाख हेक्टेयर, दलहनों का बिजाई क्षेत्र 18.69 लाख हेक्टेयर से घटकर 16.06 लाख हेक्टेयर, तिलहन फसलों का क्षेत्रफल 51.03 लाख हेक्टेयर से गिरकर 50.74 लाख हेक्टेयर तथा कपास का रकबा 38.44 लाख हेक्टेयर से फिसलकर 38.31 लाख हेक्टेयर रह गया। 

अनाजी फसलों के संवर्ग में महाराष्ट्र में धान का उत्पादन क्षेत्र 14.80 लाख हेक्टेयर से घटकर 13.66 लाख हेक्टेयर, ज्वार का क्षेत्रफल 84 हजार हेक्टेयर से फिसलकर 65 हजार हेक्टेयर, बाजरा का बिजाई क्षेत्र 3.26 लाख हेक्टेयर से गिरकर 2.79 लाख हेक्टेयर तथा मक्का का रकबा 14.44 लाख हेक्टेयर से घटकर 12.90 लाख हेक्टेयर पर अटक गया। 

दलहन फसलों में वहां तुवर का उत्पादन क्षेत्र 12.16 लाख हेक्टेयर से घटकर 11.95 लाख हेक्टेयर, मूंग का बिजाई क्षेत्र 2.09 लाख हेक्टेयर से गिरकर 1.46 लाख हेक्टेयर तथा उड़द का क्षेत्रफल 3.75 लाख हेक्टेयर से घटकर 1.97 लाख हेक्टेयर रह गया। अन्य दलहनों का रकबा लगभग समान रहा। 

तिलहन फसलों में सोयाबीन का उत्पादन क्षेत्र 49.55 लाख हेक्टेयर से गिरकर 49.13 लाख हेक्टेयर रह गया लेकिन मूंगफली का रकबा 1.35 लाख हेक्टेयर से सुधरकर 1.40 लाख हेक्टेयर पर पहुंचा। सूरजमुखी की बिजाई भी बढ़ी है।