खरीफ के बाद अब रबी सीजन में भी धान का रकबा बढ़ा

28-Jan-2026 08:50 PM

नई दिल्ली। यद्यपि घरेलू प्रभाग में चावल की आपूर्ति एवं उपलब्धता की स्थिति बेहद सुगम बनी हुई है और कीमतों में भी स्थिरता का माहौल देखा जा रहा है लेकिन फिर भी भारतीय किसान धान की खेती में कोई हिचकिचाहट नहीं दिखा रहे हैं।

उन्हें पता है कि सरकारी एजेंसी केन्द्रीय पूल के लिए उससे न्यूतनम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर धान की लगभग पूरी मात्रा की खरीद अवश्य करेगी।

धान का एमएसपी 2025-26 सीजन के लिए 69 रुपए बढ़ाकर समान्य श्रेणी के लिए 2369 रुपए प्रति क्विंटल तथा 'ए' ग्रेड के लिए 2389 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है। 

2025-26 के खरीफ सीजन में राष्ट्रीय स्तर पर धान का कुल उत्पादन क्षेत्र तेजी से उछलकर 4401 लाख हेक्टेयर के सर्वकालीन सर्वोच्च स्तर पर पहुंच गया था और मानसून की भरपूर बारिश होने से इसकी पैदावार भी अच्छी हुई।

भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) तथा उसकी सहयोगी प्रांतीय एजेंसियों द्वारा किसानों से विशाल मात्रा में धान की खरीद की जा रही है। इसकी प्रक्रिया 31 मार्च तक जारी रहेगी और इसके बाद 1 अप्रैल से रबी कालीन धान की सरकारी खरीद का सीजन आरंभ हो जाएगा। 

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार रबी कालीन धान का उत्पादन क्षेत्र इस वर्ष 23 जनवरी तक बढ़कर 31.03 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया जो पिछले साल की समान अवधि के रकबा 29.23 लाख हेक्टेयर से 1.80 लाख हेक्टेयर ज्यादा है।

उल्लेखनीय है कि पिछले रबी सीजन की सम्पूर्ण अवधि के दौरान देश में धान का सकल उत्पादन क्षेत्र 44.73 लाख हेक्टेयर पर पहुंचा था जिसे देखते हुए लगता है कि धान की खेती इस बार अगले कुछ समय तक जारी रह सकती है। धान का मौजूदा उत्पादन  पंचवर्षीय औसत क्षेत्रफल 42.93 लाख हेक्टेयर से भी काफी पीछे है। 

दिलचस्प तथ्य यह है कि खरीफ सीजन के दौरान देश के सभी राज्यों में धान की खेती होती है जबकि रबी सीजन में सीमित प्रांतों में इसकी खेती हो जाती है। इसमें दक्षिण भारत के राज्य मुख्य रूप से शामिल है।

केन्द्र सरकार ने 2025-26 के रबी सीजन के लिए चावल के उत्पादन का लक्ष्य 158.60 लाख टन निर्धारित किया है और उसे इसके हासिल हो जाने की पक्की उम्मीद है। भारत चावल का सबसे बड़ा उत्पादक एवं निर्यातक देश है।