उत्पादन घटने की आशंका से तुवर में मजबूत का माहौल

28-Jan-2026 09:06 PM

मुम्बई। विभिन्न प्राकृतिक आपदाओं से फसल को हुए नुकसान के कारण इस बार कर्नाटक एवं महाराष्ट्र जैसे सहर्ष उत्पादक राज्यों में अरहर (तुवर) का उत्पादन काफी घटने की संभावना है।

थोक मंडियों में आपूर्ति का प्रेशर नहीं देखा जा रहा है जबकि दाल मिलर्स एवं व्यापारियों / स्टॉकिस्टों द्वारा इस महत्वपूर्ण दलहन की खरीद में अच्छी दिलचस्पी दिखाई जा रही है।

म्यांमार में और साथ ही साथ अफ्रीकी देशों में उत्पादन कम होने तथा डॉलर की तुलना में रुपए का मूल्य काफी घट जाने से तुवर का आयात प्रभावित होने की संभावना है।

विदेशों से तुवर का आयात महंगा होने लगा है। यदि घरेलू बाजार में तेजी आई तो प्रमुख आपूर्तिकर्त्ता देश भी तुवर के निर्यात ऑफर मूल्य में वृद्धि कर सकते हैं। 

तुवर के घरेलू बाजार भाव में धीरे-धीरे तेजी-मजबूती का माहौल थमने लगा है और कई उत्पादक मंडियों में इसका दाम ऊपर सरकते हुए न्यूनतम समर्थन मूल्य तक पहुंच गया है जो इस बार 8000 रुपए प्रति क्विंटल नियत हुआ है। आगे इसमें कुछ और सुधार आने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है।

कर्नाटक तथा महाराष्ट्र में भाव ऊंचा रहा तो अन्य प्रमुख उत्पादक राज्यों- मध्य प्रदेश, गुजरात, तेलंगाना तथा आंध्र प्रदेश आदि में भी दाम मजबूत हो जाएगा। सरकार भी तुवर की खरीद करना चाहती है ताकि इसका बफर स्टॉक बढ़ाया जा सके।

इसके लिए कुछ राज्यों में खरीद की मंजूरी भी दी जा चुकी है लेकिन यदि थोक मंडी भाव न्यूनतम समर्थन मूल्य से ऊंचा रहा तो नैफेड एवं एनसीसीएफ को किसानों से तुवर खरीदने में कठिनाई हो सकती है। 

हालांकि केन्द्रीय कृषि मंत्रालय ने तुवर का घरेलू उत्पादन 2024-25 सीजन के 36.24 लाख टन से 27 हजार टन फिसलकर 2025-26 के मौजूदा सीजन में 35.97 लाख टन पर अटकने का अनुमान लगाया है लेकिन उद्योग-व्यापार क्षेत्र का मानना है कि वास्तविक उत्पादन इससे काफी कम हो सकता है।