जीरा का उत्पादन 80-81 लाख बोरी पर सिमटने का अनुमान

28-Jan-2026 09:22 PM

मुम्बई। गुजरात और राजस्थान जैसे शीर्ष उत्पादक प्रांतों में बिजाई क्षेत्र घटने से जीरा के उत्पादन में पुनः गिरावट आने की संभावना है।

एक अग्रणी व्यापार विश्लेषक के अनुसार जीरा के कुल बिजाई क्षेत्र में करीब 12 प्रतिशत की गिरावट आई है। गुजरात में इसका रकबा 16 प्रतिशत घटकर 3.98 लाख हेक्टेयर रह गया।

राजस्थान में भी क्षेत्रफल कम से कम 10 प्रतिशत पीछे रह गया। कमजोर बाजार भाव के कारण जीरे की खेती के प्रति किसानों का उत्साह एवं आकर्षण घट गया जबकि देर से हुई बिजाई की वजह से फसल की कटाई-तैयारी में भी विलम्ब हो जाएगा। फरवरी-मार्च का मौसम जीरा की फसल के लिए काफी महत्वपूर्ण साबित होगा क्योंकि उस समय परिपक्वता और कटाई का सीजन रहेगा। 

विश्लेषक के अनुसार जीरा का घरेलू उत्पादन 2023-24 के सीजन में उछलकर 110 लाख बोरी पर पहुंच गया था जो 2024-25 के सीजन में घटकर 90-92 लाख बोरी पर आ गया।

2025-26 के वर्तमान सीजन में उत्पादन एक बार फिर गिरकर 80-81 लाख बोरी पर सिमट जाने का अनुमान है। गुजरात और राजस्थान दोनों प्रांतों में उत्पादन घटने की संभावना है।

समीक्षकों के मुताबिक यद्यपि यह गिरावट इतनी बड़ी नहीं है कि घरेलू बाजार में जीरा का भारी अभाव उत्पन्न कर सके लेकिन आपूर्ति की स्थिति को जटिल बनाने में सहायक बन सकती है। जब मांग मजबूत रहेगी तब आपूर्ति की जटिलता से जीरा के दाम में कुछ तेजी आ सकती है। 

देश में लगभग 20 लाख बोरी जीरे का पिछला बकाया स्टॉक मौजूद है लेकिन उत्पादक केवल सीमित मात्रा में अपना माल फिलहाल मंडियों में उतार रहे हैं। क्योंकि आगामी समय में उसे कीमतों में तेजी आने की उम्मीद है।

देश में औसतन 70 लाख बोरी जीरा की औसत वार्षिक खपत होती है जबकि इसका उत्पादन इससे 10-11 लाख बोरी ज्यादा हो सकता है।

चीन सहित अन्य प्रमुख आयातक देशों की मांग मजबूत रहने पर जीरा के दाम में आगामी महीनों के दौरान तेजी की उम्मीद बरकरार रह सकती है।