खरीफ बिजाई अब भी पीछे
05-Sep-2026 12:07 PM
नई दिल्ली। मानसूनी वर्षा में कमी का अंतर घटने के बावजूद खरीफ फसलों की बिजाई गत वर्ष से काफी पीछे चल रही है। जबकि अब इसकी गति भी धीमी पड़ गई है। उत्तरी भारत में जोरदार बारिश होने तथा खेतों में पानी भर जाने से किसानों को आगे विभिन्न फसलों की बिजाई में भारी कठिनाई हो सकती है। वैसे भी खरीफ फसलों की खेती का समय जल्दी ही समाप्त होने वाला है। कुछ क्षेत्रों में बाढ़ का प्रकोप देखा जा रहा है, जिससे फसलों को नुकसान होने की आशंका बढ़ गई है। विभिन्न राज्यों में वर्षा का दौर अभी जारी है। मौसम विभाग ने सितंबर में मानसून की वर्षा सामान्य औसत से कम होने की संभावना व्यक्त की है।
मौजूदा सप्ताह के दौरान जिन इलाकों में जोरदार बारिश हुई है और हो रही है, वहां खेतों की मिट्टी में अगले 10-12 दिनों तक नमी का पर्याप्त अंश उपलब्ध रह सकता है। केवल दक्षिण भारत के साथ कुछ समस्या है। वहां तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडु एवं केरल जैसे राज्यों में मानसूनी बारिश का कुछ अभाव महसूस किया जा रहा है। महाराष्ट्र के कुछ क्षेत्रों में भी वर्षा कम हुई है, जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई है।
इस वर्ष 4 सितंबर तक खरीफ फसलों का कुल बिजाई क्षेत्र 1086.30 लाख हेक्टेयर पर पहुंचा, जो पिछले साल की समान अवधि के बिजाई क्षेत्र 1104 लाख हेक्टेयर से 1.6 प्रतिशत कम है। इसके तहत खासकर धान का क्षेत्रफल 438.20 लाख हेक्टेयर से लुढ़ककर 421.80 लाख हेक्टेयर रह गया। दूसरी ओर, दलहन फसलों का रकबा 115.30 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 117.10 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया, लेकिन मोटे अनाजों का बिजाई क्षेत्र 182.50 लाख हेक्टेयर से गिरकर 181.40 लाख हेक्टेयर, तिलहन फसलों का बिजाई क्षेत्र 193.10 लाख हेक्टेयर से घटकर 191.90 लाख हेक्टेयर तथा कपास का रकबा 109.90 लाख हेक्टेयर से फिसलकर 109.20 लाख हेक्टेयर रह गया। गन्ने की बिजाई भी कम क्षेत्रफल में हुई है।
