जीरा कीमतों में सुधार : मंदे की संभावना नहीं
05-Sep-2026 04:16 PM
नई दिल्ली। चालू सप्ताह के दौरान जीरे के भाव मजबूती के साथ बोले गए। हालांकि जन्माष्टमी पर्व के कारण गुजरात की अधिकांश मंडियों में अवकाश रहा। केवल ऊंचा मंडी में जीरा का व्यापार सुचारु रूप से जारी रहा और भाव भी 2/3 रुपए प्रति किलो तेजी के साथ बोले गए। सूत्रों का कहना है कि जीरे की वर्तमान कीमतों में अब मंदे के आसार नहीं है। क्योंकि भाव न्यूनतम स्तर पर बोले जा रहे हैं। उल्लेखनीय है कि विगत कुछ समय से जीरे में निर्यात व्यापार कम हो रहा था क्योंकि विदेशों में नए जीरे की आवक हो रही थी लेकिन विदेशों की अधिकांश फसल समाप्ति की ओर होने के करने जीरे में धीरे-धीरे निर्यातकों की लिवाली बढ़ने लगी है। जिस कारण से आग्मे दिनों में निर्यात व्यापार बढ़ने की संभावना है साथ ही लोकल में उठाव बढ़ने का अनुमान लगाया जा रहा है। वर्तमान भावों को देखते हुए संभावना व्यक्त की जा रही है कि आगामी सीजन के लिए उत्पादक केन्द्रों पर जीरे की बिजाई कम क्षेत्रफल पर की जाएगी। बिजाई का कार्य अक्टूबर माह में शुरू होगा।
चालू सीजन के दौरान देश में जीरे का उत्पादन गत वर्ष की तुलना में कम रहा लेकिन बकाया स्टॉक अधिक होने एवं चीन की कमजोर मांग के चलते कीमतों में तेजी नहीं बन पाई। व्यापारिक सूत्रों का मानना है कि चालू सीजन के दौरान गुजरात में जीरे का उत्पादन 32/32 लाख बोरी का रहा जबकि गत वर्ष उत्पादन 44/45 लाख बोरी का रहा था। राजस्थान में इस वर्ष उत्पादन 54/56 लाख बोरी माना गया है जोकि गत वर्ष की तुलना में 4/5 लाख बोरी अधिक है।
स्टॉक
जानकार सूत्रों का कहना है कि हालांकि उत्पादक केन्द्रों पर जीरे का स्टॉक पर्याप्त है लेकिन आगामी दिनों में निर्यात बढ़ने पर कीमतों में तेजी संभव है। वर्तमान में गुजरात की मंडियों में जीरे का स्टॉक 20/22 लाख बोरी होने के व्यापारिक अनुमान लगाए जा रहे हैं जबकि राजस्थान की मंडियों में स्टॉक 28/30 लाख बोरी होने के अनुमान है। वर्तमान उत्पादक केन्द्रों पर जीरे का कुल स्टॉक 48/50 लाख बोरी माना जा रहा है।
बिजाई
सूत्रों का कहना है कि किसानों को इस वर्ष धनिया, सरसों के अधिक भाव मिलने के कारण दूसरे वर्ष भी देश में जीरे की कुल बिजाई घटने के पूर्वानुमान लगाए जा रहे हैं। उल्लेखनीय है कि जीरे का मुख्यत: उत्पादन राजस्थान एवं गुजरात में होता है जीरे की बिजाई का कार्य अक्टूबर माह में शुरू हो जाता है और नए मालों की आवक जनवरी माह में शुरू हो जाती है।
आवक
कुल उत्पादन का अधिकांश माल मंडियों में आ जाने के कारण वर्तमान में मंडियों में जीरे की दैनिक आवक घट गई है। प्राप्त जानकारी के अनुसार गुजरात की प्रमुख मंडी ऊंझा में आवक 7/8 हजार बोरी की रह गया है। राजस्थान की जोधपुर मंडी में आवक 1500/2000 बोरी की चल रही है। मेडता मंडी में आवक 2000/2500 बोरी की हो रही है। नागौर में आवक 800/1000 बोरी एवं नोखा 300/400 बोरी की रह गई है। सूत्रों का कहना है कि गुजरात कुल उत्पादन का लगभग 80/85 प्रतिशत माल मंडियों में आ चुका है जबकि राजस्थान का 65/70 प्रतिशत माल आने के अनुमान लगाए जा रहे हैं।
मन्दा नहीं
सूत्रों का कहना है कि भाव न्यूनतम स्तर पर आ जाने के कारण जीरे की वर्तमान कीमतों में मंदे की संभावना नहीं है। वर्तमान में उत्पादक केंद्रों की मंडियों पर एवरेज क्वालिटी जीरे के भाव 180/210 रुपए प्रति किलो बोले जा रहे हैं। अभी बाजार में 3/5 रुपए प्रति किलो का मन्दा तेजी चलता रहेगा। लेकिन 15 सितम्बर के बाद निर्यात मांग बढ़ने पर कीमतों में अवश्य ही तेजी आने का अनुमान लगाए जा रहे हैं। क्योंकि आगामी दिनों में अंतर्राष्ट्रीय बाजार इ चीन, टर्की, सीरिया के जीरे की सप्लाई प्रभावित हो जाएगी। जिस कारण से भारतीय जीरे में निर्यात मांग बढ़ेगी।
निर्यात कम
चालू वित्त वर्ष 2026-27 के प्रथम तिमाही अप्रैल-जून 2026 के दौरान जीरा निर्यात में 24 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है जबकि निर्यात भाव कम मिलने के कारण आय में 26 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। मसाला बोर्ड द्वारा जारी आकड़ों के अनुसार अप्रैल-जून 2026 के दौरान जीरे का निर्यात 47916 टन का किया गया और निर्यात से प्राप्त आय 1118.11 करोड़ की रही। जबकि अप्रैल जून 2025 के दौरान जीरा निर्यात 62886 टन का रहा था और निर्यात से प्राप्त आय 1514.61 करोड़ की रही। वर्ष 2025-26 में जीरे का कुल निर्यात 196800 टन का हुआ और निर्यात से प्राप्त आय 4611.15 करोड़ की रही।
