ई- 85 प्रोग्राम से एथनॉल की वार्षिक मांग 3.12 अरब लीटर बढ़ेगी
08-Jun-2026 01:10 PM
नई दिल्ली। केन्द्र सरकार ने फ्लैक्स ईंधन वाहनों को चलाने के लिए ई-85 प्रोग्राम आरंभ किया है। इसके लिए जिस पेट्रोल की जरूरत होगी उसमें 20 से 100 प्रतिशत एथनॉल का मिश्रण किया जा सकता है।
एक अग्रणी उद्योग संस्था- इंडियन शुगर एंड बायो एनर्जी मैन्युफैक्चर्स एसोसिएशन (इस्मा) का कहना है कि इस प्रोग्राम के आरंभ होने के बाद देश में 3.12 अरब लीटर अतिरिक्त एथनॉल की मांग निकल सकती है।
एसोसिएशन के मुताबिक यदि नए वाहनों की बिक्री में फ्लैक्स फ्यूल व्हीकल्स (एफएफवी) की भागीदारी बढ़कर 50 प्रतिशत तक पहुंचती है तो पेट्रोल में मिश्रण के लिए 312 करोड़ लीटर एथनॉल की अतिरिक्त वार्षिक जरूरत पड़ सकती है।
इससे किसानों की आमदनी 12,400 करोड़ रुपए सालाना इजाफा हो सकता है जबकि कार्बन डाय ऑक्साइड (Co2) के उत्सर्जन में 66.40 लाख टन की कमी आ सकती है।
ई-85 प्रोग्राम के अंतर्गत एथनॉल मिश्रण पेट्रोल का दाम महज 82.12 रुपए प्रति लीटर बैठेगा जबकि ई-20 प्रोग्राम के अंतर्गत इसका मूल्य 102.12 रुपए प्रति लीटर बैठ रहा है। इससे वाहन चालकों को काफी राहत मिलेगी।
